आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को नागपुर में भगवान शिव के एक मंदिर के दर्शन के दौरान सभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने इस मुद्दे पर बात की कि दुनिया की सभी समस्याओं का मूल कारण क्या है?
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने गुरुवार को कहा कि दुनिया की सभी समस्याओं का मूल कारण मानव स्वभाव की पाँच-छह प्रवृत्तियाँ हैं। इनमें मानव का लालच, स्वार्थ शामिल है, जिसके कारण सभी समस्याएँ हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य की कट्टरता क्रोध और घृणा पैदा करती है, जिससे झगड़े होते हैं। मोहन भागवत नागपुर में भगवान शिव के एक मंदिर के दर्शन के दौरान एक समारोह में बोल रहे थे।
शिव का स्वभाव निःस्वार्थ है - मोहन भागवत
मोहन भागवत ने भगवान शिव के मूल्यों और शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि "शिव का स्वभाव निःस्वार्थ है और मानवता के लिए सब कुछ है। हमें इसी प्रकार जीवन जीने की आवश्यकता है।" भागवत ने आगे बताया कि संसार की सभी समस्याओं का मूल कारण मानव स्वभाव की पाँच-छह प्रवृत्तियाँ हैं। इनमें मनुष्य का लोभ, स्वार्थ, जिसके कारण सभी समस्याएँ हैं और मनुष्य की कट्टरता क्रोध और घृणा उत्पन्न करती है, जिससे झगड़े होते हैं।
सच्ची शिव भक्ति क्या है?
मोहन भागवत ने कहा कि - "'जो दूसरों को नहीं मिलता, वह मुझे मिलना चाहिए' जैसी स्वार्थी मानसिकता लोगों के बीच भेदभाव की प्रवृत्ति पैदा करती है। भागवत ने आगे कहा कि इन प्रवृत्तियों को बदलने के लिए भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए। व्यक्ति को अपने लिए कुछ पाने की इच्छा न रखते हुए, सभी के प्रति विनम्रता और करुणा का जीवन अपनाना चाहिए। भागवत ने कहा कि ऐसी पवित्र जीवनशैली की ओर प्रतिदिन एक कदम बढ़ाना ही सच्ची शिव भक्ति है।"
भारत को विश्व का नेतृत्व करना होगा- भागवत
भागवत ने यह भी कहा कि आज विचारक और बुद्धिजीवी कह रहे हैं कि दुनिया बदल रही है। समय बदल रहा है और इस बदलते दौर में अगर मनुष्य सही दिशा में सही कदम नहीं उठाएगा, तो उसे विनाश का सामना करना पड़ेगा। लेकिन, अगर सही दिशा में सही कदम उठाए जाएँ, तो मानवता का एक नया उन्नत रूप उभरेगा। और इस उन्नत रूप के उद्भव के लिए भारत को विश्व का नेतृत्व करना होगा। भागवत ने कहा कि भारत में दुनिया के लोगों का जीवन बदलने की शक्ति है। भारत में दुनिया को राहत देने की शक्ति है।