उपग्रह चित्रों में तबाही का मंजर साफ दिखाई दे रहा है। बचाव अभियान युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। अब तक 600 से ज़्यादा लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। सेना के चिनूक और MI-17 हेलीकॉप्टरों से बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
उत्तराखंड के धराली में बादल फटने के बाद क्या हालात हैं? इसकी उपग्रह चित्र सामने आए हैं। उपग्रह चित्रों से तबाही के निशान देखकर आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि तबाही का मंजर कितना भयावह है? चारों तरफ मलबा ही मलबा है। पूरा इलाका पानी और मलबे से भरा हुआ नज़र आ रहा है। NDRF और SDRF के जवान अभी भी यहाँ ज़िंदगी की तलाश में जुटे हैं।
तस्वीरों में डूबी इमारतें, बिखरा मलबा
ISRO/NRSC ने दो तस्वीरें जारी की हैं। पहली उपग्रह छवि 16 जून, 2024 की है, दूसरी उपग्रह छवि दुर्घटना के बाद 7 अगस्त, 2025 की है। उत्तराखंड के धराली और हरसिल में 5 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ का आकलन करने के लिए कार्टोसैट-2S डेटा का इस्तेमाल किया गया है। उच्च रिज़ॉल्यूशन वाली तस्वीरों में डूबी हुई इमारतें, बिखरा हुआ मलबा (करीब 20 हेक्टेयर) और नदी की परिवर्तित धाराएँ दिखाई दे रही हैं, जो ज़मीन पर बचाव दलों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
24 घंटे चल रहा बचाव अभियान
एक ओर, धराली में हुई तबाही के बाद की तस्वीरें अभी भी भयावह हैं, वहीं दूसरी ओर बचाव दल लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने के लिए 24 घंटे कड़ी मेहनत कर रहे हैं। हेलीकॉप्टर से भी लोगों तक राहत सामग्री पहुँचाई जा रही है। फ़िलहाल, उत्तरकाशी में सेना और वायुसेना के जवान बचाव कार्यों में लगे हुए हैं। चिनूक और एमआई 17 हेलीकॉप्टरों से लोगों को उत्तरकाशी लाया जा रहा है।
एनडीआर और एसडीआरएफ की टीमें भी लगी हुई हैं।
हर्षिल में एक हेलीपैड बनाया गया है, जहाँ से फंसे हुए लोगों को मातली स्थित आईटीबीपी के अस्थायी हेलीपैड पर लाया जा रहा है। गुरुवार को हेलीकॉप्टर से 200 से ज़्यादा लोगों को बचाया गया। यह प्रक्रिया आज भी जारी है। धराली और हर्षिल में ज़रूरी सामान भी पहुँचाया जा रहा है। चिनूक हेलीकॉप्टरों के ज़रिए एनडीआर और एसडीआरएफ की टीमें बचाव के लिए भेजी गईं। साथ ही, चिनूक के ज़रिए जनरेटर भी पहुँचाए गए हैं, ताकि बिजली की व्यवस्था की जा सके।
सैकड़ों लोग अभी भी लापता
धराली में बचाव अभियान जारी है। इस आपदा में कई लोगों ने अपना सब कुछ खो दिया है, जबकि कई लोगों के पास कुछ भी नहीं बचा है। हादसे के बाद धराली में सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं, जिनके परिवार के सदस्य लापता हैं। उनका धैर्य टूट रहा है।