- आदिवासी शहादत का प्रतीक मानगढ़ धाम फिर चर्चा में; राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देने की मांग उठी।

भारत आदिवासी पार्टी के सांसद राजकुमार रोत (बांसवाड़ा-डूंगरपुर) और कांग्रेस नेता ताराचंद भगोरा ने मांग की है कि राजस्थान के मानगढ़ धाम को 'राष्ट्रीय स्मारक' का दर्जा दिया जाए।

राजस्थान के बांसवाड़ा ज़िले में स्थित ऐतिहासिक मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग एक बार फिर राजनीति के केंद्र में आ गई है। भारत आदिवासी पार्टी के सांसद राजकुमार रोत और कांग्रेस के पूर्व सांसद ताराचंद भगोरा ने अलग-अलग वीडियो संदेश जारी कर केंद्र और राज्य सरकारों से आग्रह किया है कि वे आदिवासी समुदाय की इस लंबे समय से चली आ रही मांग को बिना देरी के पूरा करें।

इससे पहले, केंद्र सरकार ने मानगढ़ धाम को 'राष्ट्रीय स्मारक' का दर्जा देने से इनकार कर दिया था, जिसके कारण आदिवासी समुदाय में नाराज़गी पैदा हुई थी।

**राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग दोहराई गई**
भारत आदिवासी पार्टी के सांसद राजकुमार रोत ने कहा कि मानगढ़ धाम केवल एक धार्मिक या ऐतिहासिक स्थल नहीं है, बल्कि यह आदिवासी समुदाय के बलिदान, संघर्ष और आत्म-सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारें आदिवासी समुदाय की इस महत्वपूर्ण मांग को उतनी गंभीरता से नहीं ले रही हैं, जितनी इसे मिलनी चाहिए। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से मानगढ़ धाम को तुरंत राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग दोहराई।

**कांग्रेस ने भी सरकार को घेरा**
इस बीच, ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के पूर्व राष्ट्रीय सचिव और पूर्व सांसद ताराचंद भगोरा ने भी एक वीडियो जारी कर कहा कि 2022 में प्रधानमंत्री के मानगढ़ धाम दौरे के दौरान इस स्थल को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन यह वादा अभी तक पूरा नहीं हुआ है। इसे आदिवासी समुदाय की भावनाओं के साथ अन्याय बताते हुए उन्होंने कहा कि अब चुनावी वादों को ज़मीनी हकीकत में बदलने का समय आ गया है।

**मानगढ़ धाम: 'आदिवासियों का जलियांवाला बाग'**
दोनों नेताओं ने बताया कि 17 नवंबर 1913 को गोविंद गुरु के नेतृत्व में मानगढ़ धाम में हुए भयानक नरसंहार में हज़ारों भील आदिवासी शहीद हुए थे। इसी ऐतिहासिक बलिदान के कारण मानगढ़ धाम को 'आदिवासियों का जलियांवाला बाग' कहा जाता है। उनका तर्क है कि इसे राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देने से न केवल शहीदों को राष्ट्रीय सम्मान मिलेगा, बल्कि आदिवासी इलाकों में पर्यटन, रोज़गार और विकास को भी नई गति मिलेगी। मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग राजनीतिक और सामाजिक, दोनों स्तरों पर तेज़ी पकड़ रही है। भारत आदिवासी पार्टी और कांग्रेस, दोनों ही इस मुद्दे को प्रमुखता से उठा रहे हैं। हालाँकि, इस मामले पर सरकार की ओर से अब तक कोई नई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।



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