- गंगा एक्सप्रेसवे से लेकर बुंदेलखंड तक: उत्तर प्रदेश उद्योगों के नेटवर्क से बदल जाएगा, और ये कॉरिडोर अर्थव्यवस्था को पंख दे रहे हैं।

गंगा एक्सप्रेसवे से लेकर बुंदेलखंड तक: उत्तर प्रदेश उद्योगों के नेटवर्क से बदल जाएगा, और ये कॉरिडोर अर्थव्यवस्था को पंख दे रहे हैं।

उत्तर प्रदेश तेज़ी से एक कृषि प्रधान राज्य से भारत के मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस में बदल रहा है, जिसमें एक्सप्रेसवे-आधारित इंडस्ट्रियल कॉरिडोर निवेश और रोज़गार के नए केंद्र बन रहे हैं।

उत्तर प्रदेश, जो कभी अपनी मुख्य रूप से कृषि अर्थव्यवस्था के लिए जाना जाता था, अब भारत के 'मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस' के रूप में उभर रहा है। राज्य के इंडस्ट्रियल कॉरिडोर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के $1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित हो रहे ये कॉरिडोर न केवल निवेश आकर्षित कर रहे हैं, बल्कि लाखों युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर भी पैदा कर रहे हैं।

कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर का संगम

उत्तर प्रदेश में फिलहाल छह चालू और निर्माणाधीन एक्सप्रेसवे हैं, जो देश में सबसे ज़्यादा हैं। राज्य सरकार ने रणनीतिक रूप से इन एक्सप्रेसवे के दोनों ओर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित करने का फैसला किया है। उद्योगों के लिए हज़ारों एकड़ ज़मीन आरक्षित की गई है, मुख्य रूप से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे।

प्रमुख इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और उनका प्रभाव

1. यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर: यह उत्तर प्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है। यह आगरा, अलीगढ़, चित्रकूट, झांसी, कानपुर और लखनऊ जैसे शहरों को जोड़ता है। यहां ब्रह्मोस मिसाइलों से लेकर ड्रोन और रक्षा उपकरणों तक सब कुछ बनाने वाली यूनिटें स्थापित की जा रही हैं।

2. दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC): पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक बड़ा हिस्सा इस कॉरिडोर से फायदा उठा रहा है। ग्रेटर नोएडा में 'इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप' इसका एक प्रमुख उदाहरण है, जहां ग्लोबल कंपनियाँ निवेश कर रही हैं।

3. अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (AKIC): यह कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के मध्य और पूर्वी हिस्सों से गुज़रता है, जिससे लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग सेक्टर को बड़ा बढ़ावा मिल रहा है।

नए निवेश और रोज़गार के आंकड़े

हाल ही में हुए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश को मिले कुल निवेश प्रस्तावों का एक बड़ा हिस्सा इन इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए है। अकेले नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में ही इलेक्ट्रॉनिक्स और डेटा सेंटर हब में ₹1 लाख करोड़ से ज़्यादा का निवेश किया जा चुका है। वहीं, बुंदेलखंड जैसे पिछड़े माने जाने वाले क्षेत्रों में भी अब बड़ी सीमेंट और टेक्सटाइल यूनिटें स्थापित की जा रही हैं।

ये कॉरिडोर इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं?

कम लॉजिस्टिक्स लागत: एक्सप्रेसवे और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर ने माल ढुलाई को सस्ता और तेज़ बना दिया है।
सिंगल-विंडो क्लीयरेंस: निवेशक निवेश मित्र पोर्टल के ज़रिए आसानी से ज़मीन और परमिट प्राप्त कर रहे हैं।
बिना रुकावट बिजली आपूर्ति: औद्योगिक क्षेत्रों के लिए विशेष पावर फीडर लगाए गए हैं। उत्तर प्रदेश के इंडस्ट्रियल कॉरिडोर सिर्फ़ सड़कें नहीं हैं; वे विकास की धमनियां हैं जो राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा दे रही हैं। अगर विकास की यही रफ़्तार जारी रही, तो वह दिन दूर नहीं जब उत्तर प्रदेश न सिर्फ़ भारत बल्कि दक्षिण एशिया में भी सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बनकर उभरेगा।

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