- अखिलेश यादव आज 'मुन्ना समोसा' चखेंगे, यह सपा प्रमुख की प्रोग्राम लिस्ट में क्यों आया, क्या है इसमें अलग?

अखिलेश यादव आज 'मुन्ना समोसा' चखेंगे, यह सपा प्रमुख की प्रोग्राम लिस्ट में क्यों आया, क्या है इसमें अलग?

अखिलेश यादव आज जिस "मुन्ना समोसा" की दुकान पर समोसे खाने जा रहे हैं, उसकी कहानी 1973 की है, जब नेहरू नगर में इसकी पहली दुकान खुली थी। राम गुप्ता परिवार की तीन पीढ़ियां आज भी यह बिज़नेस चला रही हैं।

समाजवादी पार्टी के नेशनल प्रेसिडेंट अखिलेश यादव आज शहर में एक शादी में शामिल होंगे और कानपुर की सबसे पॉपुलर दुकान "मुन्ना समोसा" का स्वाद चखने भी जाएंगे, इसलिए कानपुर की गलियों में समोसे की खुशबू फैलने वाली है। अखिलेश यादव पहले भी कानपुर के समोसे की तारीफ कर चुके हैं, और अब वह अपना पुराना वादा पूरा कर रहे हैं। यह खबर न सिर्फ पॉलिटिकल गलियारों में बल्कि खाने के शौकीनों में भी उत्साह पैदा कर रही है।

उनके पिछले दौरे के दौरान समोसा का प्लान बनाया गया था।

गौर करने वाली बात यह है कि जब अखिलेश यादव 12 फरवरी को कानपुर आए थे, तो उन्होंने वहां के लोगों से पूछा था कि यहां क्या ज़्यादा पॉपुलर है: कचौरी या समोसा। लोगों ने समोसे का जवाब दिया, खासकर "मुन्ना समोसा"। अखिलेश ने पहले कहा था, "मैं प्रोग्राम के बाद समोसे खाने जाऊंगा।" लेकिन, बिज़ी शेड्यूल की वजह से वह उस दिन नहीं आ पाए। इस बार, वह खास तौर पर बिरहाना रोड पर इस दुकान पर रुकेंगे। वह दोपहर करीब 3:30 बजे पहुंचेंगे और समोसे का मज़ा लेंगे।

1973 में शुरू हुई थी पहली दुकान
"मुन्ना समोसा" की कहानी, जहाँ अखिलेश यादव समोसे खाने जा रहे हैं, 1973 में शुरू होती है, जब नेहरू नगर में इसकी पहली दुकान खुली थी। राम गुप्ता परिवार की तीन पीढ़ियाँ इस बिज़नेस को चला रही हैं। उनके दादा ने इसे शुरू किया था, फिर उनके बेटों ने और अब उनके पोते-पोतियाँ इसे आगे बढ़ा रहे हैं। आज, नेहरू नगर, गोविंद नगर, पी रोड और बिरहाना रोड में इसकी कई ब्रांच हैं। दुकान का नाम "मुन्ना समोसा" सुनते ही कानपुर वालों के मुँह में पानी आ जाता है।

इसकी खासियत क्या है?
यहाँ के समोसे की सबसे खास बात हींग का इस्तेमाल है। दुकान के मालिक रामजी गुप्ता बताते हैं कि समोसा मसाला में हींग डालने का चलन सबसे पहले यहीं शुरू हुआ, जिससे इसका स्वाद अनोखा और शानदार हो गया। आम आलू समोसे से लेकर क्रीमी पनीर समोसा, पिज़्ज़ा पनीर समोसा और चीज़ कॉर्न समोसा तक, वैरायटी की कोई कमी नहीं है। एक सादा आलू समोसा सिर्फ़ 10 रुपये का है, जबकि पनीर वाला 20-25 रुपये का है। लोग इन्हें चखने के लिए दूर-दूर से आते हैं। क्रिस्पी क्रस्ट, मसालेदार फिलिंग और हींग की अनोखी खुशबू ने इसे एक ब्रांड बना दिया है।

फूलों के बढ़ने की उम्मीद
दुकान के मालिक रामजी गुप्ता और अर्पित गुप्ता ने कहा, "हम सबके लिए खुले हैं। चाहे अखिलेश यादव आएं या कोई और, हमारा पॉलिटिकल झुकाव नहीं है। हमारा एकमात्र मकसद अच्छा खाना देना है। जो भी आएगा हम उसका दिल से स्वागत करेंगे।" अखिलेश यादव के आने से दुकान पर आने वालों की संख्या बढ़ने और कानपुर के स्ट्रीट फ़ूड कल्चर को एक नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

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