दिल्ली कांग्रेस प्रेसिडेंट देवेंद्र यादव ने शराब स्कैम में अरविंद केजरीवाल के बरी होने की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि यह नेशनल पॉलिटिक्स में दोहरे मापदंड को दिखाता है।
कांग्रेस प्रेसिडेंट देवेंद्र यादव के शनिवार (28 फरवरी) को जारी एक बयान ने दिल्ली की पॉलिटिक्स में नया राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बावजूद, अरविंद केजरीवाल BJP की "वॉशिंग मशीन" में खुद को धोकर साफ दिखने की कोशिश कर रहे हैं।
देवेंद्र यादव ने आगे कहा कि यह मॉडल दिखाता है कि सत्ता के आगे झुकने पर आरोपों के दाग फीके पड़ जाते हैं। उनके मुताबिक, यह नेशनल पॉलिटिक्स में जांच एजेंसियों के दोहरे मापदंड और चुनिंदा इस्तेमाल को दिखाता है।
2022 की शिकायत फिर उठाई गई।
देवेंद्र यादव ने याद दिलाया कि 3 जून, 2022 को दिल्ली कांग्रेस ने एक फॉर्मल शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत में पंजाब अकाली दल के नेता दीप मल्होत्रा का नाम था और शराब पॉलिसी पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। उन्होंने कहा कि पंजाब में BJP और अकाली दल के बीच संभावित गठबंधन की चर्चाओं के बीच यह मामला और भी ज़रूरी हो जाता है।
लेफ्टिनेंट गवर्नर और मास्टर प्लान पर उठाए सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उस समय भी लेफ्टिनेंट गवर्नर की भूमिका और मास्टर प्लान के उल्लंघन पर सवाल उठाए गए थे। लेकिन, कोई साफ जवाब नहीं मिला और न ही जांच एजेंसियां इस बारे में कोई ठोस कार्रवाई कर रही हैं। उन्होंने कहा कि जरूरी तथ्यों को नजरअंदाज किया गया।
डेलीगेशन ने शराब घोटाले से जुड़े दस्तावेज जमा किए
यादव के मुताबिक, 5 सितंबर, 2022 को दिल्ली कांग्रेस का एक डेलीगेशन दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग के पास गया था। डेलीगेशन ने शराब घोटाले से जुड़ी कंपनी सोम ग्रुप द्वारा BJP के अकाउंट में ₹2 करोड़ के डोनेशन से जुड़े दस्तावेज जमा किए और जांच की मांग की।
उन्होंने आरोप लगाया कि अगर जांच निष्पक्ष होती, तो BJP के बड़े नेता और केजरीवाल दोनों कानून के दायरे में होते। इसके उलट, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन और एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट की कार्रवाई चुनावी मजबूरियों से प्रभावित लगती है।
कथित सरेंडर पॉलिटिक्स
देवेंद्र यादव ने कहा कि देश में एक खतरनाक ट्रेंड बन रहा है, जहां सत्ता के आगे सरेंडर करने पर आरोप कमजोर पड़ते दिखते हैं। उन्होंने दावा किया कि गुजरात और पंजाब में केजरीवाल का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश की जा रही है। इस बीच, तमिलनाडु में चुनावी माहौल के बीच कांग्रेस के सीनियर नेता पी. चिदंबरम को परेशान करने की तैयारी इसी स्ट्रैटेजी का हिस्सा लगती है।
राउज़ एवेन्यू कोर्ट और CAG रिपोर्ट का ज़िक्र किया
यादव ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी और BJP के बीच कथित खींचतान के संकेत राउज़ एवेन्यू कोर्ट की कार्रवाई से मिले, जहां CBI कथित तौर पर ठोस सबूत पेश करने में नाकाम रही। उन्होंने कहा कि केजरीवाल से जुड़ी 14 CAG रिपोर्ट पर कार्रवाई न होना भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
ट्रायल कोर्ट द्वारा अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के खिलाफ आरोप खारिज करने के बाद, यादव ने सवाल किया कि जब डॉ. मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी और शीला दीक्षित के खिलाफ आरोप लगाए गए थे, तब केजरीवाल की सेंसिटिविटी कहां थी। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक फायदे के लिए मीडिया ट्रायल और बदनाम करने का कैंपेन चलाया गया। ED और CBI पर निशाना
यादव ने कहा कि मोदी सरकार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल शतरंज के मोहरों की तरह करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी चुनाव होते हैं, ED और CBI ज़्यादा एक्टिव हो जाती हैं। इस पॉलिटिकल स्ट्रैटेजी में राहुल गांधी लगातार निशाने पर रहते हैं, जबकि दूसरे नेताओं को हालात के हिसाब से "काला या गोरा" दिखाया जाता है।
शराब पॉलिसी को लेकर भी सवाल उठाए
दिल्ली कांग्रेस ने शराब पॉलिसी को लेकर फिर कई सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि अगर अरविंद केजरीवाल पूरी तरह ईमानदार थे, तो गड़बड़ी का पता चलते ही पॉलिसी वापस क्यों ली गई और फिर उसमें बदलाव क्यों किया गया? कई मोबाइल फोन और सिम कार्ड क्यों नष्ट कर दिए गए? कमीशन 6 परसेंट से बढ़ाकर 12 परसेंट क्यों किया गया?
उन्होंने कहा कि ये सवाल कल्पना पर आधारित नहीं हैं, बल्कि पब्लिक में मौजूद फैक्ट्स पर आधारित हैं। उन्होंने "एक खरीदो, एक फ्री पाओ" जैसी स्कीमों के सोशल असर और शराब पीने की उम्र कम करने के फैसले को भी गंभीर चिंता का विषय बताया।
यादव ने कहा कि दिल्ली एक्साइज केस में फैसला लोअर कोर्ट का है। उन्होंने कहा कि पहले भी दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने इससे जुड़े मामलों में गंभीर बातें कही हैं। यह देखना बाकी है कि यह फैसला ऊपरी अदालतों में कैसा रहता है। कानूनी प्रक्रिया अभी खत्म नहीं हुई है।
कांग्रेस पारदर्शिता की मांग पर अड़ी हुई है
देवेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली कांग्रेस पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्ष जांच की अपनी मांग पर अड़ी हुई है। जनता को सच जानने का पूरा हक है और कांग्रेस इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाती रहेगी। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी अदालत जनता की अदालत है, जहां उनके अनुसार केजरीवाल पहले ही दोषी साबित हो चुके हैं।