- भारत 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदेगा: ₹3.25 लाख करोड़ की रक्षा डील; सरकार ने 'अनुरोध पत्र' (Letter of Request) जारी किया

भारत 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदेगा: ₹3.25 लाख करोड़ की रक्षा डील; सरकार ने 'अनुरोध पत्र' (Letter of Request) जारी किया

भारतीय वायु सेना प्रमुख एपी सिंह 1 जून से फ्रांस की आधिकारिक यात्रा पर हैं। इसी बीच, भारत सरकार ने फ्रांस को 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए 'अनुरोध पत्र' (Letter of Request) जारी किया है। इस सौदे की अनुमानित कीमत ₹3.25 लाख करोड़ है।


भारत ने फ्रांस को 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए एक बड़े रक्षा सौदे—जिसकी कीमत लगभग ₹3.25 लाख करोड़ है—के संबंध में एक 'अनुरोध पत्र' (LoR) जारी किया है। इस समझौते के तहत, 114 राफेल विमानों में से 94 विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा, जिससे 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' (स्व-निर्भर भारत) पहलों को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलेगा। यह ध्यान देने योग्य है कि वायु सेना प्रमुख एपी सिंह इस समय फ्रांस में हैं। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और फ्रांस के बीच 114 अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमानों के लिए संभावित बड़े सौदे के संबंध में तेजी से प्रगति हो रही है।


₹3.25 लाख करोड़ का सौदा
वायु सेना प्रमुख फ्रांस में राफेल लड़ाकू विमानों की निर्माता कंपनी, डसॉल्ट एविएशन (Dassault Aviation) की सुविधाओं का दौरा करेंगे। इसके अतिरिक्त, वे MBDA की सुविधाओं का भी निरीक्षण करेंगे, जिसकी मिसाइलों का उपयोग भारतीय वायु सेना के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर किया जाता है। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत औपचारिक रूप से फ्रांस को 114 राफेल विमानों की खरीद के लिए 'अनुरोध पत्र' (LoR) भेजने की प्रक्रिया में है। प्रस्तावित सौदे की अनुमानित कीमत लगभग ₹3.25 लाख करोड़ है। इस सौदे के लिए भारत की प्रमुख शर्तों में स्वदेशी हथियारों का एकीकरण, भारतीय डेटा लिंक का समावेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (ToT), और भारत के भीतर बड़े पैमाने पर निर्माण शामिल हैं। 


राफेल डील की मुख्य बाते  कुल 114 राफेल विमान
88 सिंगल-सीटर और 26 ट्विन-सीटर ट्रेनर विमान
लगभग 96 विमान भारत में ही बनाए जा सकते हैं, जबकि शुरुआती यूनिट सीधे फ्रांस से मंगवाई जाएंगी
इसमें AESA रडार, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों की क्षमता होगी
55–60% तक स्वदेशीकरण (localization) का लक्ष्य रखा गया है
इंजन, एयरफ्रेम और एवियोनिक्स के क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग बढ़ने की उम्मीद है


इतिहास में लड़ाकू विमानों की अब तक की सबसे बड़ी खरीद
यह दौरा सिर्फ राफेल की खरीद तक ​​ही सीमित नहीं है। इसमें भविष्य के रक्षा सहयोग, स्वदेशी AMCA कार्यक्रम के लिए इंजन तकनीक, भारत के भीतर एयरोस्पेस निर्माण इकोसिस्टम और भारत-फ्रांस रक्षा साझेदारी को और मजबूत करने जैसे विषयों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि फरवरी 2026 में रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक में, भारतीय वायु सेना के लिए 114 मल्टी-रोल लड़ाकू विमानों (MRFA)—विशेष रूप से राफेल लड़ाकू विमानों—की खरीद के लिए 'आवश्यकता की स्वीकृति' (AoN) दी गई थी। इसे भारत के इतिहास में लड़ाकू विमानों की खरीद की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है।




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