- होली और मुहर्रम पर शराब पर बैन नहीं, छत्तीसगढ़ सरकार के फैसले से राजनीतिक हंगामा

होली और मुहर्रम पर शराब पर बैन नहीं, छत्तीसगढ़ सरकार के फैसले से राजनीतिक हंगामा

छत्तीसगढ़ सरकार ने अपनी नई एक्साइज़ पॉलिसी में होली, मुहर्रम और गांधी निर्वाण दिवस पर शराब की दुकानें खोलने की मंज़ूरी दे दी है। सात की जगह तीन दिन शराबबंदी होगी। इस फ़ैसले से राजनीतिक और सामाजिक बहस छिड़ गई है।

छत्तीसगढ़ सरकार ने अपनी नई एक्साइज़ पॉलिसी में बड़ा बदलाव करते हुए होली, मुहर्रम और गांधी निर्वाण दिवस पर शराब की दुकानें खुली रखने की इजाज़त दे दी है। पहले, इन तारीखों पर पूरे राज्य में पूरी तरह से ड्राई डे मनाया जाता था, और सभी लाइसेंस वाली शराब की दुकानें बंद रहती थीं। इस फ़ैसले से राजनीतिक पार्टियों और सामाजिक संगठनों में तीखी बहस छिड़ गई है।

रायपुर के अधिकारियों के मुताबिक, बदली हुई गाइडलाइंस का मकसद त्योहारों के दौरान आने वाली एडमिनिस्ट्रेटिव और प्रैक्टिकल चुनौतियों को दूर करना है। पहले, कानून-व्यवस्था और सामाजिक संवेदनशीलता बनाए रखने के लिए धार्मिक और राष्ट्रीय मौकों पर शराब की बिक्री पर रोक थी।

रेवेन्यू बढ़ाने की नई स्ट्रैटेजी

सरकार का कहना है कि इस कदम का मकसद "रेगुलेशन और प्रैक्टिकल हालात के बीच बैलेंस बनाना" है। नई पॉलिसी के तहत, इन खास तारीखों पर लगी रोक हटा दी गई है, जबकि दूसरे मौकों पर ड्राई डे लागू रहेंगे।

इस फ़ैसले के सपोर्टर्स का कहना है कि इससे राज्य का रेवेन्यू बढ़ेगा। अधिकारियों के मुताबिक, बड़े त्योहारों के दौरान शराब की डिमांड आम दिनों से ज़्यादा होती है, जिससे सरकारी रेवेन्यू बढ़ने की उम्मीद है। यह भी कहा गया है कि लाइसेंस वाली दुकानें खुली रखने से गैर-कानूनी शराब की बिक्री और ब्लैक मार्केटिंग पर रोक लगेगी, क्योंकि ड्राई डे के दौरान ऐसी गतिविधियां बढ़ जाती हैं।

ड्राई डे के फैसले पर विवाद, मंत्री ने बचाव किया

राज्य मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने फैसले का बचाव करते हुए कहा, "सात ड्राई डे को घटाकर तीन करना बदलते समय के हिसाब से लिया गया फैसला है।" उन्होंने कहा कि सरकार सामाजिक और आर्थिक हालात के हिसाब से पॉलिसी में बदलाव कर रही है। सरकार नशा मुक्ति जागरूकता कैंपेन और पैदल मार्च के ज़रिए लोगों को शराब से दूर रहने के लिए मोटिवेट करने का भी दावा करती है।

हालांकि, इस फैसले की कड़ी आलोचना भी हुई है। कई संगठनों ने शराब बेचने की इजाज़त पर, खासकर गांधी के निर्वाण दिवस पर, ऐतराज़ जताया है। गांधीवादी ग्रुप्स का कहना है कि यह फैसला महात्मा गांधी के उसूलों और नशा मुक्ति के उनके आदर्शों के खिलाफ है।

विपक्षी पार्टियों ने भी सरकार पर नैतिक मूल्यों से ज़्यादा रेवेन्यू को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इस कदम से सामाजिक संदेश कमज़ोर हो सकता है।

पूरे राज्य में इस मुद्दे पर बड़ी बहस जारी है

इस घोषणा के बाद, पूरे राज्य में इस मुद्दे पर बड़ी बहस चल रही है। समर्थक इसे गैर-कानूनी शराब के धंधे पर रोक लगाने के लिए एक प्रैक्टिकल कदम बता रहे हैं, वहीं विरोधी इसे समाज के लिए चिंता का विषय मान रहे हैं। ड्राई डे की संख्या सात से घटाकर तीन करना और खास त्योहारों पर लगी रोक हटाना इस समय छत्तीसगढ़ में चर्चा और विवाद के मुख्य विषय हैं।

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