- 'यह इमारत भूतिया है; यहाँ आत्माएँ भटकती हैं' — मंत्री संजय शिरसाट ने दिया अजीबोगरीब बयान।

'यह इमारत भूतिया है; यहाँ आत्माएँ भटकती हैं' — मंत्री संजय शिरसाट ने दिया अजीबोगरीब बयान।

महाराष्ट्र के मंत्री संजय शिरसाट ने एक अजीब बयान दिया है, जिससे एक राजनीतिक बहस छिड़ गई है। उन्होंने दावा किया कि नगर निगम की इमारत में भूत-प्रेत का साया है और वहां आत्माएं भटकती रहती हैं। जानिए उन्होंने ऐसा दावा क्यों किया।


छत्रपति संभाजी नगर नगर निगम में एक कार्यक्रम के दौरान, शिवसेना नेता संजय शिरसाट ने एक अजीब बयान दिया। शिरसाट ने कहा, "पहले यहां शवों को दफनाया जाता था। चूंकि यह जगह कभी कब्रिस्तान का हिस्सा थी, इसलिए मुझे लगता है कि यहां रहने वाली आत्माएं कभी-कभी लोगों को डराती हैं, जिससे लोगों में बेचैनी फैलती है।" उन्होंने आगे कहा, "अगर आप इससे छुटकारा पाना चाहते हैं, तो इस इमारत को किसी बेहतर जगह पर ले जाएं; इस तरह, आत्माओं और आपको, दोनों को राहत मिलेगी।" नगर निगम के इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास को लेकर शिरसाट की टिप्पणियों ने हलचल मचा दी है, जिससे इस मुद्दे पर राजनीतिक चर्चा और तेज़ हो गई है।

**दफ़्तर को नई जगह पर ले जाएं**

छत्रपति संभाजी नगर (महाराष्ट्र) के पालक मंत्री संजय शिरसाट ने नगर निगम की मौजूदा इमारत को लेकर कड़ी नाराज़गी ज़ाहिर की। इस जगह को अशुभ बताते हुए, उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इसका नकारात्मक प्रभाव प्रशासनिक कामकाज पर बुरा असर डाल रहा है। उन्होंने आगे दावा किया कि विकास परियोजनाओं में रुकावटें आ रही हैं—ऐसी रुकावटें जिनका कारण वे पूरी तरह से इन आत्माओं की मौजूदगी को मानते हैं। शिरसाट ने प्रस्ताव दिया कि नगर निगम की एक नई इमारत किसी ज़्यादा सही जगह पर बनाई जाए, जैसे कि पंचवटी चौक। उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि मौजूदा ढांचे में छोटे-मोटे बदलाव करना बेकार होगा और शहर के बेहतर भविष्य को पक्का करने के लिए एक नई इमारत बहुत ज़रूरी है। शिरसाट की टिप्पणियों ने, असल में, नगर निगम की हालिया उस पहल को पीछे छोड़ दिया है, जिसका मकसद अपने अग्निशमन विभाग की क्षमताओं को मज़बूत करना था। पालक मंत्री ने नई इमारत के निर्माण के लिए ज़रूरी फंड जुटाने का भी वादा किया।

**सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं**

संजय शिरसाट के बयान का एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेज़ी से वायरल हो गया, जिस पर यूज़र्स की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आईं। कुछ लोगों ने इस बयान की आलोचना की और इसे अवैज्ञानिक और असंवेदनशील बताया। उन्होंने तर्क दिया कि इस तरह के बयान नगर निगम के सामने मौजूद ज़रूरी नागरिक और प्रशासनिक चुनौतियों से लोगों का ध्यान भटकाने का काम कर सकते हैं।

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