CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसमें फ़ेक न्यूज़ और गलत जानकारी फैलाने वाले कैंपेन के लिए ₹2 करोड़ के मुआवज़े की मांग की गई है।
दिल्ली हाई कोर्ट में निजता के अधिकार (right to privacy) से जुड़े एक मामले की सुनवाई शुरू हो गई है। CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि उन्होंने कुछ लोगों और संगठनों के खिलाफ़ रोक लगाने (इंजंक्शन) और ₹2 करोड़ के मुआवज़े की मांग करते हुए याचिका दायर की है। उनका आरोप है कि ये लोग उनके खिलाफ़ फ़ेक न्यूज़ और गलत जानकारी फैला रहे थे और उनकी निजी ज़िंदगी में दखल दे रहे थे।
सौरव दास ने कहा, "मैंने कुछ लोगों और संगठनों से ₹2 करोड़ के मुआवज़े और रोक लगाने (इंजंक्शन) की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। ये लोग मेरे खिलाफ़ फ़ेक न्यूज़ और कई तरह की गलत जानकारी फैला रहे थे और मेरी निजी ज़िंदगी में दखल दे रहे थे। यह मामला निजता के अधिकार से जुड़ा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई शुरू कर दी है।"
**'X ने ट्वीट्स पर कार्रवाई की'**
उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X ने विवादित ट्वीट्स के खिलाफ़ पहले ही कार्रवाई कर दी है। इसलिए, कोर्ट से तुरंत रोक का आदेश लेने की ज़रूरत नहीं पड़ी।
सौरव दास ने कहा, "X प्लेटफ़ॉर्म ने इन सभी ट्वीट्स के खिलाफ़ पहले ही सक्रिय रूप से कार्रवाई की है। इसीलिए आज रोक के आदेश (इंजंक्शन) की ज़रूरत नहीं पड़ी। अगली सुनवाई 14 सितंबर को तय की गई है, जब रोक की अर्ज़ी पर विस्तार से सुनवाई होगी।"
**निजता के अधिकार की सुरक्षा की उम्मीद**
सौरव दास ने उम्मीद जताई कि दिल्ली हाई कोर्ट इस मामले में हर व्यक्ति के निजता के अधिकार को बनाए रखेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री से जुड़े मामलों का भी ज़िक्र किया।
उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि हाई कोर्ट सिर्फ़ मेरे ही नहीं, बल्कि हर व्यक्ति के निजता के अधिकार की रक्षा करेगा। हाई कोर्ट ने पहले भी कई लोगों के निजता के अधिकारों की रक्षा की है, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी की डिग्री से जुड़े मामले भी शामिल हैं। इसलिए, मुझे पूरा भरोसा है कि निजता के अधिकार से जुड़ी यह याचिका भी सफल होगी। हमें दिल्ली हाई कोर्ट पर पूरा भरोसा है।" मामले की अगली सुनवाई 14 सितंबर को तय है। इस सुनवाई के दौरान, रोक की अर्ज़ी पर विस्तार से सुनवाई होगी।