मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की कोशिशें सिर्फ़ तीर्थ और टूरिस्ट जगहों के डेवलपमेंट तक ही सीमित नहीं हैं; इन डेवलपमेंट कामों का फ़ायदा वहाँ के लोगों तक पहुँचाना भी उनकी प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिपुर कालसी का दौरा किया और इलाके को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विकास के बड़े तोहफ़े दिए। उन्होंने देवी यमुना की एक मूर्ति का अनावरण किया, हरिघाट का उद्घाटन किया और माँ यमुना-कृष्ण मंदिर की नींव रखी। इस मौके पर, यमुना के पवित्र किनारे पर 'आशीर्वाद का दीया' प्रोग्राम और यमुना आरती का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कई साधु-संतों और बड़ी संख्या में लोगों के साथ गहरी श्रद्धा के साथ यमुना आरती में हिस्सा लिया। आस्था और भक्ति से भरे इस कार्यक्रम ने कालसी में यमुना नदी के किनारे को गहरे आध्यात्मिक माहौल से भर दिया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कालसी की ज़मीन इतिहास, आस्था और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं से भरी हुई है। देवी यमुना की मूर्ति का अनावरण, हरिघाट का उद्घाटन और यमुना आरती जैसे इवेंट्स इस इलाके की आध्यात्मिक पहचान को और मज़बूत करेंगे। माँ यमुना-कृष्ण मंदिर की नींव रखना भी कालसी के धार्मिक और सांस्कृतिक विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है।
'आशीर्वाद का दीया' और यमुना आरती: 2,100 दीयों से पवित्र यमुना तट रोशन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर यमुना के पवित्र तट पर आयोजित 'आशीर्वाद का दीया' प्रोग्राम और यमुना आरती बड़ी श्रद्धा और आध्यात्मिक उत्साह के साथ खत्म हुई। इवेंट के दौरान, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नदी तट पर दीया जलाया और राज्य की सुख, समृद्धि, शांति और लोगों की भलाई के लिए प्रार्थना की। मुख्यमंत्री के साथ-साथ साधु-संतों, भक्तों और मौजूद बड़ी भीड़ ने भी दीये जलाए। कुल मिलाकर, 2,100 दीयों ने यमुना के पवित्र तटों को रोशन किया। एक साथ जले 2,100 दीयों की चमक से यमुना नदी का किनारा शानदार और दिव्य चमक से नहा उठा। दीयों की जगमगाती चमक के बीच, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साधु-संतों, बड़ी संख्या में भक्तों और स्थानीय निवासियों के साथ देवी यमुना की *आरती* में श्रद्धा से हिस्सा लिया। राज्य की खुशहाली, शांति और लोगों की भलाई के लिए प्रार्थना की गई। आस्था, रोशनी और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर यह नज़ारा कालसी की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की एक जीवंत अभिव्यक्ति बन गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को हमारी *सनातन* परंपराओं से जोड़ने और राज्य की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को देश और दुनिया को दिखाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
**हनोल मास्टर प्लान के लिए ₹150 करोड़ की मंज़ूरी**
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जौनसार-बावर क्षेत्र के समग्र विकास की दिशा में लगातार काम कर रही है। हनोल मास्टर प्लान के लिए ₹150 करोड़ की मंज़ूरी इस दिशा में एक अहम कदम है। इस पहल से धार्मिक टूरिज्म से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर के डेवलपमेंट में मदद मिलेगी और भक्तों और टूरिस्ट के लिए बेहतर सुविधाएं पक्की होंगी।
उन्होंने आगे कहा कि सरकार लाखामंडल समेत जौनसार इलाके की दूसरी ऐतिहासिक, धार्मिक और टूरिस्ट जगहों की सुंदरता और डेवलपमेंट पर भी खास ध्यान दे रही है। इन इलाकों में बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और टूरिज्म की संभावनाओं को अनलॉक करने की कोशिशें चल रही हैं।
**धार्मिक टूरिज्म से लोकल इकॉनमी को फायदा होगा**
मुख्यमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सरकार की कोशिशें सिर्फ तीर्थ और टूरिस्ट जगहों को डेवलप करने तक ही सीमित नहीं हैं; इन डेवलपमेंट कामों का फायदा लोकल लोगों तक पहुंचाना भी प्राथमिकता है। टूरिज्म एक्टिविटी के बढ़ने से होमस्टे, लोकल प्रोडक्ट, हैंडीक्राफ्ट, ट्रांसपोर्ट, फूड सर्विस और दूसरे सेल्फ-एम्प्लॉयमेंट के कामों को बढ़ावा मिलेगा। इससे लोकल युवाओं और एंटरप्रेन्योर्स के लिए रोजगार और सेल्फ-एम्प्लॉयमेंट के नए मौके बनेंगे, जिससे इलाके की इकॉनमी मजबूत होगी।
उन्होंने कहा कि जौनसार-बावर की अनोखी लोक संस्कृति, परंपराएं, आर्किटेक्चर और प्राकृतिक सुंदरता उत्तराखंड के लिए एक अनमोल धरोहर है। विकास के साथ-साथ इन परंपराओं और विरासत को बचाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। आस्था, विरासत और विकास का संगम बन रहा उत्तराखंड
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तराखंड में धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों के विकास को नई गति मिली है। चार धाम के साथ-साथ राज्य भर में अलग-अलग प्राचीन, ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को बेहतर सुविधाओं से जोड़ने की कोशिशें चल रही हैं। इस संदर्भ में, कालसी, हनोल, लाखामंडल और जौनसार-बावर क्षेत्र के धार्मिक और पर्यटन महत्व को नई पहचान देने के लिए व्यवस्थित तरीके से काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड की आस्था और आध्यात्मिक विरासत को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं के साथ जोड़ना है,
इसके द्वारा राज्य के विकास और स्थानीय रोजगार के लिए एक आधार स्थापित किया जाएगा।
इस अवसर पर विधायक मुन्ना सिंह चौहान, सचिव रणवीर सिंह चौहान, अपर सचिव बंशीधर तिवारी, परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द मुनि, अन्य जन प्रतिनिधि, विभिन्न साधु-संत तथा बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी उपस्थित थे।