उत्तराखंड हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस लोकपाल सिंह ने राहुल गांधी के चुनाव आयोग के दफ़्तर में घुसने को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि अगर कोई बिना इजाज़त किसी जगह में घुसता है, तो FIR दर्ज करना पूरी तरह सही है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग बढ़ रही है और देश भर में उनके ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। विपक्ष उनके इस्तीफ़े की मांग कर रहा है। इस बीच, उत्तराखंड हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस लोकपाल सिंह ने कहा है कि सरकार उन्हें सीधे नहीं हटा सकती; उन्हें सिर्फ़ महाभियोग (impeachment) की संवैधानिक प्रक्रिया से ही हटाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि जहाँ तक मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की बात है, तो यह पूरी तरह से उनकी अपनी मर्ज़ी पर निर्भर करता है। अगर किसी पद पर बैठा व्यक्ति किसी भी कारण से इस्तीफ़ा देना चाहता है, तो वह कभी भी ऐसा कर सकता है। हालाँकि, मुख्य चुनाव आयुक्त या किसी अन्य चुनाव आयुक्त को हटाने के मामले में, सरकार उन्हें सीधे बर्खास्त नहीं कर सकती; उन्हें हटाने का काम सिर्फ़ महाभियोग की संवैधानिक प्रक्रिया से ही हो सकता है।
**विरोध प्रदर्शन के लिए तय जगहें ज़रूरी हैं**
उत्तराखंड हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस लोकपाल सिंह ने कहा कि हर किसी को विरोध करने का अधिकार है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के कुछ सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया और आकाशवाणी भवन में धरना दिया। धरने जैसी गतिविधियों के लिए तय जगहें होती हैं; वे दिल्ली पुलिस से इजाज़त ले सकते थे। किसी को भी बिना इजाज़त विरोध प्रदर्शन करने या सरकारी विभाग के दफ़्तर में घुसने की अनुमति नहीं होनी चाहिए—चाहे वह आकाशवाणी हो, दूरदर्शन हो, सुप्रीम कोर्ट हो या भारत का चुनाव आयोग हो। थोड़ी ज़िम्मेदारी का एहसास होना ज़रूरी है।
**अपॉइंटमेंट लेना चाहिए**
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का दफ़्तर एक सार्वजनिक संस्थान है जहाँ संवैधानिक पदों पर बैठे लोग अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं। इसलिए, अगर कोई मुख्य चुनाव आयुक्त या किसी अन्य चुनाव आयुक्त से मिलना चाहता है, तो पहले अपॉइंटमेंट के लिए लिखित अनुरोध भेजना चाहिए। बिना पूर्व अनुमति के किसी सरकारी अधिकारी के दफ़्तर में घुसना—चाहे वह चुनाव आयोग का हो या किसी अन्य सरकारी विभाग का—कैसे सही माना जा सकता है?
जहाँ तक बैठक की बात है, तो उसकी जगह संसद भवन नहीं है; यह भारत के चुनाव आयोग का कार्यालय है। जो लोग अधिकारियों से मिलना चाहते हैं, उनका यह कर्तव्य है कि वे पहले अपॉइंटमेंट के लिए औपचारिक अनुरोध करें और बताएं कि वे ज्ञापन सौंपना चाहते हैं। उन्हें मिलने के लिए एक तय समय का अनुरोध करना चाहिए। हालांकि, 240 सांसदों को साथ लाना और भीड़ जमा करना कार्यालय पर दबाव डालने जैसा है। इसे कैसे सही ठहराया जा सकता है? कोई भी 240 सांसदों को एक साथ मिलने की अनुमति नहीं देगा। अगर ज्ञापन सौंपना है, तो ऐसा किया जा सकता है; लेकिन चुनाव आयोग की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा? अगर कोई भीड़ सीधे कार्यालय में घुस जाए, तो कोई अप्रिय घटना हो सकती है। सुरक्षा एक बड़ी चिंता है।
**FIR सही ढंग से दर्ज की गई**
राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR के संबंध में—खासकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य सांसदों के मामले में—उन्होंने कहा कि अगर कोई बिना अनुमति और कानून व स्थापित प्रक्रियाओं का पालन किए बिना किसी जगह में प्रवेश करता है, तो FIR दर्ज करना पूरी तरह से उचित है। पुलिस नियमों के अनुसार कार्रवाई करेगी, और वास्तव में, उन्हें कानूनी कार्यवाही शुरू करनी चाहिए।