मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर की समृद्धि राज्य के उज्ज्वल भविष्य की कहानी लिखेगी। मार्च 2026 तक माओवाद के बचे-खुचे निशान भी समाप्त हो जाएँगे।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज (11 सितंबर) जगदलपुर में छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि बस्तर हमारी नई औद्योगिक नीति के केंद्र में है। खनिज संसाधनों और प्रचुर प्राकृतिक संपदा से भरपूर इस क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएँ हैं। माओवाद बस्तर के विकास की राह में काँटे की तरह चुभ रहा था और नक्सली आतंक ने बस्तर के विकास को अपनी गिरफ्त में ले रखा था। हमने बस्तर को मुख्यधारा में लाने और इसे विकसित छत्तीसगढ़ की केंद्रीय धुरी बनाने का संकल्प लिया है।
2026 तक माओवाद के बचे-खुचे निशान भी समाप्त हो जाएँगे - मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे वीर जवानों और बस्तरवासियों ने साहस और दृढ़ संकल्प के साथ माओवाद का मुकाबला किया और आज बस्तर माओवाद के काले इतिहास को मिटाकर निवेश का स्वर्णिम अध्याय लिखने की राह पर आगे बढ़ रहा है। मार्च 2026 तक माओवाद के बचे-खुचे निशान भी समाप्त हो जाएँगे और नक्सल मुक्त बस्तर विकास के पथ पर और भी तेज़ी से आगे बढ़ेगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज जगदलपुर में छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।
यह बुलेट ट्रेन की गति का युग है - मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि टोक्यो, जापान के ओसाका और दक्षिण कोरिया के सियोल के बाद, हमने इन्वेस्टर्स कनेक्ट कार्यक्रम की अगली श्रृंखला के लिए बस्तर संभाग को चुना और हमें खुशी है कि हम इतनी जल्दी यह आयोजन कर पाए। यह बुलेट ट्रेन की गति का युग है और इसी गति के साथ कदम मिलाकर चलते हुए हमने विकसित भारत - विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए नई औद्योगिक नीति बनाई है। हमारी यह नीति यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिखाए गए सुशासन के परफॉर्म, रिफॉर्म और ट्रांसफॉर्म के मंत्र पर आधारित है।
लगभग 6 लाख 65 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आ चुके हैं - मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि तेजी से विकसित हो रहे उद्योगों के आधार पर विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की नींव रखी जाएगी। इसे ध्यान में रखते हुए, नई औद्योगिक नीति में राज्य में निवेश के लिए अनुदान और प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है और व्यापार सुगमता तथा व्यापार गति के संकल्प के अनुरूप साढ़े तीन सौ से अधिक सुधार किए गए हैं। जापान और दक्षिण कोरिया के अलावा, हमने मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और नवा रायपुर में भी निवेश शिखर सम्मेलन आयोजित किए हैं। नई औद्योगिक नीति लागू होने के बाद, हमें अब तक लगभग 6 लाख 65 हज़ार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। नई नीति में आईटी, एआई, फार्मा, टेक्सटाइल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और हरित ऊर्जा से जुड़े माध्यमों के साथ-साथ कोर सेक्टरों पर विशेष अनुदान प्रावधान रखे गए हैं।
नवा रायपुर में भारत का पहला एआई डेटा सेंटर पार्क - मुख्यमंत्री
उन्होंने आगे कहा कि आकर्षक अनुदान प्रावधानों के साथ-साथ, हम उद्यमियों को ऐसी बुनियादी संरचना भी प्रदान कर रहे हैं जिससे वे एकल खिड़की प्रणाली से निवेश प्रस्ताव स्वीकृत होते ही औद्योगिक क्षेत्र में अपना उद्यम स्थापित कर सकें। नवा रायपुर इसका एक उदाहरण है, जहाँ भारत का पहला एआई डेटा सेंटर पार्क बनाया गया है। यहाँ फार्मास्युटिकल पार्क, मेडिसिटी और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर भी बनाए जा रहे हैं। अब अगर बस्तर में औद्योगिक अधोसंरचना की स्थिति की बात करें तो सभी जिलों और विकासखंडों में नए छोटे औद्योगिक क्षेत्र स्थापित किए जा रहे हैं। जगदलपुर के फ्रेजरपुर गाँव और गीदम रोड में औद्योगिक क्षेत्र स्थापित हैं। नगरनार के पास नियानार में 118 एकड़ क्षेत्र में एक नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया गया है। कांकेर के लखनपुरी गाँव, दंतेवाड़ा के टेकनार और नारायणपुर में औद्योगिक क्षेत्र स्थापित हैं। हमारी सरकार सुकमा के साथ-साथ कोंडागांव के पकेला गाँव, फंदीगुड़ा, अड़का-छेपड़ा गाँव और बीजापुर के कोडोली गाँव में भी औद्योगिक क्षेत्र स्थापित कर रही है।
रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन पर काम जारी है - मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बस्तर के अधोसंरचना को सबसे अधिक लाभ हुआ है। विशाखापट्टनम जाने वाला एक्सप्रेसवे यहीं से होकर गुजर रहा है। रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन पर काम चल रहा है और तेलंगाना को किरंदुल से जोड़ने वाले रेल मार्ग का सर्वेक्षण किया जा रहा है। माँ दंतेश्वरी हवाई अड्डा जगदलपुर को उड़ान परियोजना से उन्नत किया गया है। बोधघाट परियोजना पर जल्द ही काम शुरू होगा। कनेक्टिविटी के इस युग में आगे रहने के लिए बस्तर में नए मोबाइल टावर लगाए जा रहे हैं। इन बड़ी अधोसंरचना परियोजनाओं से बस्तर के औद्योगिक वातावरण में व्यापक सुधार होगा।
बस्तर के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं - मुख्यमंत्री
उन्होंने कहा कि वैसे तो पूरे राज्य में नए निवेश पर अनुदान के प्रावधान हैं, लेकिन बस्तर के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। नई औद्योगिक नीति में बस्तर के 88 प्रतिशत विकासखंडों को ग्रुप-3 में चिन्हित किया गया है। उद्यमियों को यहाँ निवेश करने से अधिकतम लाभ मिलेगा। हमारी सरकार समावेशी विकास पर काम करती है और हमारी प्राथमिकता है कि पिछड़े वर्ग को उद्यमिता का पहला अवसर मिले। इसलिए, एससी-एसटी वर्ग के उद्यमियों के लिए 10 प्रतिशत अतिरिक्त अनुदान का प्रावधान भी किया गया है। उद्योग लगाने के पीछे उद्देश्य न केवल अर्थव्यवस्था को गति देना है, बल्कि बड़े पैमाने पर रोज़गार का सृजन भी है। इस रोज़गार में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए, 1,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश करने वाली या 1,000 से अधिक लोगों को रोज़गार देने वाली इकाइयों के लिए अतिरिक्त अनुदान का प्रावधान किया गया है। आत्मसमर्पित नक्सलियों को रोज़गार देने वाले उद्यमियों को पाँच वर्षों तक 40 प्रतिशत वेतन अनुदान दिया जाएगा, जिसकी सीमा 5 लाख रुपये प्रति वर्ष होगी।