: सिद्धारमैया सरकार ने कर्नाटक में अनुसूचित जातियों के लिए आंतरिक आरक्षण को हरी झंडी दे दी है। जानिए कि उपलब्ध 15 प्रतिशत आरक्षण को तीन समूहों में कैसे बांटा गया है।
कर्नाटक में सिद्धारमैया सरकार ने बेंगलुरु में हुई कैबिनेट बैठक के दौरान अनुसूचित जातियों के लिए आंतरिक आरक्षण को मंज़ूरी दे दी है। सिद्धारमैया प्रशासन के इस फ़ैसले को एक अहम फ़ैसला माना जा रहा है। इस आंतरिक आरक्षण नीति को लागू करने के लिए, अनुसूचित जाति वर्ग के अंतर्गत आने वाले समुदायों को तीन अलग-अलग समूहों में बांटा गया है, और हर समूह के लिए आरक्षण का एक तय कोटा तय किया गया है।
**अनुसूचित जाति वर्ग को तीन समूहों में बांटकर 15% SC कोटे का बंटवारा कैसे किया गया**
अपने कैबिनेट सहयोगियों के साथ यह घोषणा करते हुए, CM सिद्धारamैया ने कहा कि कर्नाटक सरकार ने अनुसूचित जातियों के लिए उपलब्ध 15 प्रतिशत आरक्षण को अलग-अलग समूहों में बांटने का फ़ैसला किया है। इस फ़ैसले के अनुसार, 5.25 प्रतिशत आरक्षण 'दलित वाम-हस्त' (Dalit Left-Hand) समुदाय को, 5.25 प्रतिशत 'दलित दक्षिण-हस्त' (Dalit Right-Hand) समुदाय को, और 4.5 प्रतिशत आरक्षण अनुसूचित जाति वर्ग के अन्य समूहों को दिया गया है।
**आंतरिक आरक्षण पर सिद्धारमैया का बयान**
आंतरिक आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए बुलाई गई एक विशेष कैबिनेट बैठक के बाद, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा, "आंतरिक आरक्षण कर्नाटक की जनता को—खासकर अनुसूचित जाति समुदाय को, लेकिन असल में सभी को—यह संदेश देता है कि हमारी पार्टी सामाजिक न्याय के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है, और हम सभी समुदायों को न्याय दिलाने के लिए पूरी तरह से संकल्पित हैं।"
**अनुसूचित जाति समुदायों के लिए एक संवेदनशील मुद्दा**
यह ध्यान देने वाली बात है कि आंतरिक आरक्षण का मुद्दा काफ़ी समय से एक संवेदनशील विषय बना हुआ है, जिसकी वजह अनुसूचित जाति वर्ग के अंतर्गत आने वाले 'दलित वाम-हस्त' और 'दलित दक्षिण-हस्त' समुदायों के बीच मौजूद मतभेद हैं। इस मामले पर विचार-विमर्श करने के लिए पहले भी कैबिनेट बैठकें बुलाई गई थीं; लेकिन, अब तक कोई अंतिम फ़ैसला नहीं हो पाया था।
**अनुसूचित जाति समुदायों का वर्गीकरण**
**वाम-हस्त समुदाय (Left-Hand Community):** इस समूह में मुख्य रूप से 'मादिगा' समुदाय और उसकी उप-जातियां शामिल हैं, जो पारंपरिक रूप से चमड़े से जुड़े कामों से जुड़े रहे हैं।
**दक्षिण-हस्त समुदाय (Right-Hand Community):** इस समूह में मुख्य रूप से 'होलिया'/'चलवादी' समुदायों के सदस्य शामिल हैं, जो ऐतिहासिक रूप से खेती-बाड़ी से जुड़े मज़दूरी के कामों में लगे रहे हैं। 'स्पृश्य' SCs: लम्बानी, बोवी, कोरमा और कोरचा जैसे समूह—जो 'वाम-हस्त' और 'दक्षिण-हस्त' समुदायों के दायरे से बाहर आते हैं—उन्हें 'स्पृश्य' दलित जातियाँ माना जाता है।