त्योहारों के मौसम से पहले देश में प्याज की कीमतें धीरे-धीरे कम हो रही हैं। सरकार ने अपने बफ़र स्टॉक से ₹35 प्रति किलोग्राम की दर से प्याज जारी करके कीमतें कम करने में काफी मदद की है।
त्योहारों से पहले प्याज की गिरती कीमतों से आम लोगों को काफी राहत मिली है। यह ट्रेंड थोक बाजारों (मंडियों) में प्याज की आवक बढ़ने की वजह से देखा जा रहा है। सरकार ने अपने बफ़र रिज़र्व से स्टॉक जारी करके कीमतें कम करने में अहम भूमिका निभाई है।
सरकार का कहना है कि प्याज की उपलब्धता संतोषजनक है और आने वाले महीनों में सप्लाई में और सुधार होने की उम्मीद है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2 सितंबर से 11 सितंबर के बीच प्याज की अखिल भारतीय औसत मॉडल कीमत 9.1% गिरकर ₹3,721 प्रति क्विंटल से ₹3,383 प्रति क्विंटल हो गई।
**सरकार ने क्या रणनीति अपनाई?**
NCCF और NAFED जैसी सरकारी एजेंसियों द्वारा संचालित मोबाइल वैन और रिटेल आउटलेट्स के माध्यम से प्याज ₹35 प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जा रहा है। इसके अलावा, ज़्यादा खपत वाले शहरों में सप्लाई तेज़ी से बढ़ाने के लिए विशेष 'कांदा एक्सप्रेस' ट्रेनों और सड़क परिवहन का इस्तेमाल किया जा रहा है। अब तक इन माध्यमों से लगभग 9,200 मीट्रिक टन प्याज पहुंचाया जा चुका है।
**बाजारों में बढ़ी सप्लाई**
पिछले साल की तुलना में बाजारों में प्याज की आवक भी अधिक रही है। 2 अप्रैल से 11 सितंबर के बीच, देश भर के बाजारों में लगभग 85.06 लाख मीट्रिक टन (LMT) प्याज की सप्लाई की गई। यह पिछले साल इसी अवधि के दौरान सप्लाई किए गए 82.48 LMT की तुलना में 3.14% की वृद्धि है।
प्याज उत्पादन करने वाले प्रमुख राज्य महाराष्ट्र में, इस अवधि के दौरान औसत बाजार कीमत ₹4,011 प्रति क्विंटल से गिरकर ₹3,842 प्रति क्विंटल हो गई - यानी लगभग 4.2% की गिरावट। सरकार का कहना है कि देश में प्याज की मौजूदा उपलब्धता अच्छी स्थिति में है। खरीफ और देर से खरीफ (late-Kharif) की फसलों से उत्पादन अच्छा होने की उम्मीद है, जिससे आने वाले महीनों में सप्लाई और बढ़ सकती है।
खुदरा कीमतें कब कम होंगी?
थोक बाजारों के साथ-साथ सामान्य खुदरा बाजारों में भी सरकारी पहलों का असर जल्द ही दिखने की उम्मीद है। अगले एक-दो हफ़्तों में प्याज़ की कीमतें ₹5 से ₹10 प्रति किलोग्राम तक कम होने का अनुमान है। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे उत्पादक राज्यों में भारी बारिश के कारण नई खरीफ़ फ़सल की कटाई में लगभग 3-4 हफ़्ते की देरी हुई है, इसलिए बाज़ार में नई फ़सल की आवक अक्टूबर के आख़िरी हफ़्ते या नवंबर की शुरुआत में तेज़ी पकड़ेगी। जैसे-जैसे थोक बाज़ारों में सप्लाई बढ़ेगी, कीमतें कम होंगी।