-हिंसा को लेकर बीएसएफ डीआईजी का खुलासा, राज्य चुनाव आयोग भी जिम्मेदार
कोलकाता । पश्चिम बंगाला में चुनाव के दौरान हुई हिंसा के लिए ममता सरकार व चुनाव आयोग को जिम्मेदर ठहराया गया है। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के डीआईजी एसएस गुलेरिया ने रविवार को चुनावों के दौरान राज्य में हुईं हिंसा पर खुलासा किया है। उन्होंने इसके लिए सीधे तौर पर ममता बनर्जी सरकार और राज्य चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया। जानकारी के मुताबिक, उन्होंने कहा कि हमने संवेदनशील मतदान केंद्रों की जानकारी के संबंध में पश्चिम बंगाल राज्य चुनाव आयोग को कई पत्र लिखे थे, लेकिन 7 जून को पश्चिम बंगाल सरकार ने केवल संवेदनशील मतदान केंद्रों की संख्या बताई और उसके स्थान या अन्य विवरण प्रदान नहीं किए।

सीएपीएफ के 59,000 जवानों और 25 राज्यों के राज्य सशस्त्र पुलिस का सुरक्षा के लिए पर्याप्त इस्तेमाल नहीं किया गया।’ डीआइजी गुलेरिया ने कहा कि राज्य ने केवल 4834 संवेदनशील बूथ घोषित किए हैं, जिन पर केवल सीएपीएफ तैनात हैं, लेकिन संवेदनशील मतदान केंद्रों की वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक थी। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के लिए मतदान के दौरान हुई हिंसा में करीब 13 लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा मतपेटियों में तोड़फोड़ की गई और कई गांवों में प्रतिद्वंद्वी गुटों ने एक दूसरे पर बम फेंके।

पंचायत चुनाव के दौरान हुई हिंसा में मारे गए 12 लोगों में सत्तारूढ़ दल तृणमूल कांग्रेस के आठ सदस्य, भारतीय जनता पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), कांग्रेस और इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के एक-एक कार्यकर्ता शामिल हैं। बीएसएफ मुखिया ने बताया कि राज्य चुनाव आयोग ने शनिवार को पश्चिम बंगाल राज्य में 3317 ग्राम पंचायतों, 341 पंचायत समितियों और 20 जिला परिषदों के लिए चुनाव कराने के लिए कुल 61,636 मतदान केंद्र स्थापित किए थे। चुनावों के सुरक्षित संचालन के लिए, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) और अन्य राज्य पुलिस बलों के 59,000 कर्मियों को राज्य भर में मतदान केंद्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी, जिसमें 4834 संवेदनशील बूथ भी शामिल थे, जिन पर केवल सीएपीएफ तैनात थे। सभी मतपेटियों को राज्य भर के 339 स्ट्रांग रूम में सुरक्षित रखा गया और स्ट्रांग रूम की सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) को दी गई है।
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इधर चुनाव संबंधी मौतों के लिए राज्य निर्वाचन आयुक्त राजीव सिन्हा को दोषी ठहराते हुए भाजपा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र लिखकर राज्य में लोकतंत्र बहाल करने में उनके ‘हस्तक्षेप’ की मांग की और आरोप लगाया कि राज्य में ‘सत्तारूढ़ दल द्वारा लोकतंत्र की हत्या’ कर दी गई, क्योंकि सुरक्षा बल मूकदर्शक बने रहे। चुनावी हिंसा में अपने आठ समर्थकों को खोने वाली सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने हिंसा के लिए विपक्षी दलों पर आरोप लगाया और मतदाताओं की रक्षा करने में विफलता के लिए केंद्रीय बलों की आलोचना की। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में सभी जिलों में बूथ पर कब्जा किए जाने, धांधली और फर्जी मतदान का जिक्र करते हुए दावा किया गया कि ‘मतदान के दिन ही राजनीतिक हिंसा में 15 मौतें हुईं।’ राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने मांग की कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जाए या अनुच्छेद 355 का इस्तेमाल किया जाए।