पार्टी ने आरोप लगाया कि हमारे प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया और उल्टे इस पहल पर नकारात्मक और हास्यास्पद टिप्पणियाँ की गईं और हमें चुनाव न लड़ने की सलाह दी गई और हमारी उदारता को हमारी कमज़ोरी समझा गया।
बिहार में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियाँ तेज़ हो गई हैं। इस बीच, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने एक बार फिर राष्ट्रीय जनता दल के साथ गठबंधन की आखिरी कोशिश शुरू कर दी है। इसी के तहत एआईएमआईएम के नेता और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के घर पहुँचे और गठबंधन न करने पर सवाल उठाए।
एआईएमआईएम ने राजद को भेजा था पत्र, क्या थी माँग?
अख्तरुल ईमान ने बताया कि 2 जुलाई को ही पार्टी ने राजद को एक पत्र भेजकर गठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई थी। इसकी प्रति गठबंधन के सभी घटक दलों के नेताओं को दी गई थी। इसमें कहा गया था कि एआईएमआईएम पार्टी के लिए कम से कम 6 विधानसभा क्षेत्र आरक्षित किए जाएँ। सरकार बनने पर सीमांचल विकास परिषद का गठन किया जाए और सीमांचल को विशेष पैकेज दिया जाए तथा बिहार में दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों की उनकी जनसंख्या के अनुपात में सभी स्तरों पर भागीदारी सुनिश्चित की जाए। लेकिन राजद ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
आपने हमारी उदारता को अपनी कमज़ोरी समझा।
अख्तरुल ईमान ने कहा कि यह अफ़सोस की बात है कि आपने हमारे प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार नहीं किया, बल्कि हमारी सकारात्मक पहल पर नकारात्मक और हास्यास्पद टिप्पणियाँ कीं और हमें चुनाव न लड़ने की सलाह दी और हमारी उदारता को हमारी कमज़ोरी समझा। हद तो यह है कि आपने हमारे पत्र का औपचारिक उत्तर देना भी ज़रूरी नहीं समझा। अख्तरुल ईमान ने याद दिलाया कि 2005 के विधानसभा चुनाव में राजद को बहुमत नहीं मिला था। लोजपा के दिवंगत राष्ट्रीय नेता रामविलास पासवान जी ने आपको अपने 29 विजयी विधायकों के साथ इस शर्त पर समर्थन देने का प्रस्ताव दिया था कि राजद अपनी पार्टी के किसी मुस्लिम विधायक को मुख्यमंत्री बनाए। लेकिन आपने इस प्रस्ताव को ठुकराकर बिहार में भाजपा की सरकार तो बना ली, लेकिन अपनी पार्टी के किसी मुस्लिम को मुख्यमंत्री बनाना बर्दाश्त नहीं किया।
धर्मनिरपेक्ष वोटों के बिखराव के लिए राजद पूरी तरह ज़िम्मेदार
अख्तरुल ईमान ने कहा कि बिहार के राजनीतिक हालात 2005 जैसे ही हैं। ऐसे समय में एआईएमआईएम के गठबंधन में शामिल होने के प्रस्ताव को ठुकराना राजद के मुस्लिम प्रतिनिधित्व के विरोध का प्रतीक है, जबकि राजद की बुनियाद ही एमवाई समीकरण पर टिकी है। अख्तरुल ईमान ने कहा कि राजद ने आगामी विधानसभा चुनाव में एआईएमआईएम को अलग चुनाव लड़ने पर मजबूर किया है। ऐसे में अगर धर्मनिरपेक्ष वोटों का बिखराव होता है, तो इसके लिए राजद पूरी तरह ज़िम्मेदार होगा।