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पीठासीन अधिकारियों पर छींटाकशी करने वालों को भुगतनी होगी सजा
-राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति ने सांसदों को दी चेतावनी, सदन की अवमानना न करें
नई दिल्ली । राज्यसभा के पीठासीन अधिकारियों पर छींटाकशी करने वालों को अब सजा मिल सकती है, इसलिए राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति ने सदस्यों को चेतावनी दी है। समिति ने कहा कि चेयरमेन की नीयत पर सवाल उठाना विशेषाधिकार का हनन है। विशेषाधिकार समिति ने सदस्यों के ऐसा करने की बढ़ती घटनाओं पर यह कहा है। समिति ने कहा कि अब किसी सदस्य ने ऐसा किया तो उसे सदन की अवमानना के सथ ही इसे विशेषाधिकार हनन माना जाएगा। चेतावनी देते हुए समिति ने कहा कि अब ऐसी हरकत का वो नतीजा होगा जो नजीर बनेगा।
गौरतलब है कि विशेषाधिकार समिति की यह टिप्पणी तृणमूल कांग्रेस की सांसद डोला सेन के खिलाफ शिकायत पर विचार करते समय आई। सेन ने पिछले साल कथित रूप से राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन हरिवंश को लेकर टीका-टिप्पणी की थी। समिति के सामने अपने जवाब में टीएमसी सांसद ने माना कि उन्होंने उपसभापति के बारे में कुछ अनाप-शनाप बातें कहीं थीं। सेन ने बिना शर्त माफी मांग ली थी। समिति ने माफी के बाद पाया कि आगे की जांच का कोई तुक नहीं बनता। मामले को अब समाप्त करने की भी सिफारिश हुई है।
गौरतलब है कि विशेषाधिकार समिति की यह रिपोर्ट पिछले हफ्ते सदन में रखी गई। इसमें कहा गया, हालांकि, समिति का यह भी मानना है कि पीठासीन अधिकारियों पर आरोप लगाने और प्रक्रिया के नियमों और अध्यक्ष के निर्देशों की घोर अवहेलना करने की घटनाएं बढ़ रही हैं, समिति का मानना है कि सदस्यों को अपने आचरण में अधिक सावधान और सतर्क रहना चाहिए। विशेष रूप से कोई भी बयान देते समय, जो पीठासीन अधिकारियों के सम्मान और प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकता है। बता दें कि पिछले साल, बीजेपी के तीन सदस्यों ने सेन के खिलाफ विशेषाधिकार का नोटिस दिया था। सेन ने शून्यकाल के दौरान किसी मुद्दे पर बोलने के लिए रूपा गांगुली को अनुमति देने पर सभापति को लेकर टिप्पणी की थी। इसके बाद भी सीएमसी सांसद की टिप्पणी सामने आई थी।
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