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अमेरिका में पूर्व पाकिस्तानी राजदूत ने अपने मुल्क पाकिस्तान को सुनाई खरी-खरी
वाशिंगटन । अमेरिका में पूर्व पाकिस्तानी राजदूत हुसैन हक्कानी ने बदलती दुनिया में व्यावहारिकता के महत्व पर जोर देकर पाकिस्तान से वैश्विक मामलों में अपने दृष्टिकोण का पुनर्मूल्यांकन करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की सरकार और सेना के भीतर के तत्वों पर लंबे समय से भारत और अफगानिस्तान में जिहादी समूहों का समर्थन करने का आरोप लगाया गया है। इस्लामाबाद इस आरोप का जोरदार खंडन करता है। हक्कानी ने पिछले तीन दशकों में आंतरिक सत्ता संघर्ष और पड़ोस में जिहाद में पाकिस्तान की व्यस्तता पर प्रकाश डाला। उन्होंने तर्क दिया कि इस फोकस ने 1991 में सोवियत संघ के पतन के साथ शीत युद्ध की समाप्ति के बाद से विश्व स्तर पर हुए गहन परिवर्तनों को समझने की पाकिस्तान की क्षमता में बाधा उत्पन्न की है।
उन्होंने लिखा कि 1950 से 1980 के दशक तक अमेरिकी सहयोगी रहने के कारण पाकिस्तान को उस एकध्रुवीय क्षण से लाभ होना चाहिए था जब अमेरिका विश्व व्यवस्था पर हावी था। इसके बजाय, भारत के बारे में नकारात्मकता में अमेरिका-विरोध जोड़ने का मूर्खतापूर्ण विकल्प चुना गया, जो आजादी के बाद से राष्ट्रीय डीएनए का हिस्सा रहा है। हक्कानी ने बताया कि अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता और चीन और भारत के बीच 1962 के सीमा युद्ध के बावजूद, इन देशों ने राजनीतिक और सुरक्षा मामलों को आर्थिक हितों से अलग रखकर व्यापार जारी रखा है।
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