उसके बाद से ही दर जस की तस बनी हुई है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि मुद्रास्फीति अब भी तय लक्ष्य से ऊपर है और वृद्धि दर भी बढ़ रही है। इसलिए केंद्रीय बैंक का ध्यान मुद्रास्फीति को 4 फीसदी या उसके नीचे लाने पर होगा। मौद्रिक नीति समिति ने तरलता पर अंकुश लगाने की कोशिश की है और आगे भी वह ऐसा ही चाहेगी। बैंकिंग तंत्र में तरलता नवंबर में और भी घट गई है। यही वजह है कि आरबीआई ने पिछले गुरुवार को बैंकिंग तंत्र में 48,754 करोड़ रुपये डाले हैं। वस्तु एवं सेवा कर के मासिक भुगतान के कारण 21 नवंबर को तरलता में अंतर 5 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया था।
केंद्रीय बैंक ने उस दिन भी 1.74 लाख करोड़ रुपये डाले थे। सर्वेक्षण में शामिल सभी प्रतिभागियों ने अनुमान लगाया कि एमपीसी के सदस्य उदारता खत्म करने के रुख पर कायम रहेंगे क्योंकि मुद्रास्फीति बढ़ने का जोखिम अब भी बना हुआ है। उनका कहना है किआरबीआई का रुख समायोजन वापस लेने का ही रहेगा क्योंकि मुद्रास्फीति बढ़ने का जोखिम अब भी बना हुआ है। वृद्धि भी मजबूत बनी हुई है। इसलिए उनके पास मौद्रिक नीति में सख्ती बनाए रखने की गुंजाइश है।