नई दिल्ली । नारी शक्ति के पुनर्जागरण काल में 75वां गणतंत्र दिवस समारोह महिला शौर्य, शक्ति व साहस के साथ उनके अद्भूत संतुलन का साक्षी बना। बुलेट बाइक पर सांसें थाम देने वाली हैरतअंगेज प्रस्तुति हो या परेड में सधे कदमताल के साथ रोबदार आवाज, सभी ने दर्शकों के साथ मेहमानों को गौर्वांवित किया। इसमें इन बेटियों के माता-पिता व परिवार के सदस्य भी थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में बदलते भारत की यह सुनहरी और ठोस तस्वीर कुछ मिनटों में ही कर्तव्य पथ पर इस तरह से सामने आई, जो दर्शकों के दिलों पर वर्षों तक राज करने वाला है। सबकी जुबान पर था- अद्भूत, अकल्पनीय, अविस्मरणीय।
यहां काफी कुछ ऐसा ऐतिहासिक घटित हुआ, जो पहले नहीं हुआ था। महिला शक्ति का परचम इस कदर पहली बार कर्तव्य पथ पर लहरा रहा था। दिल्ली पुलिस की पहली महिला टुकड़ी ने पहली बार परेड में हिस्सा लिया। दिल्ली पुलिस की टुकड़ी में तीन महिला उप-निरीक्षक, 44 महिला हेड-कॉन्स्टेबल और 100 महिला कॉन्स्टेबल शामिल थीं। दस्ते का नेतृत्व वर्ष 2018 बैच की आईपीएस अधिकारी श्वेता सुगाथन ने किया। लाल साफा बांधे वर्दी में महिला पुलिसकर्मियों के कदम ताल को सभी चकित होकर देख रहे थे। साथ ही तालियों की गड़गड़ाहट गुंजायमान थी।
जैसे ही हमारी टुकड़ी लाल किले पर पहुंची, हमारे वरिष्ठ अधिकारियों ने बड़े उत्साह के साथ हमारा स्वागत किया। उन्होंने पिछले वर्ष भी कर्तव्य पथ पर पुरुष मार्चिंग टुकड़ियों का नेतृत्व किया था। देश के गणतंत्र बनने के बाद से दिल्ली पुलिस की टुकड़ी को हर गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेने का अनूठा गौरव प्राप्त है। जब पहली महिला टुकड़ी और दिल्ली पुलिस के बैंड ने इस गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर मार्च किया। इस क्षेत्र में भी अब बनी बनाई अवधारणा टूटी है।
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