सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक IDBI को बेचने की तैयारियों के बीच, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उनके बयान का जवाब दिया है।
यह सर्वविदित है कि सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक कई लोगों के जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए, किसी बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक को बेचने का कोई भी प्रस्ताव स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन जाता है। फिलहाल, IDBI बैंक को बेचने की संभावना को लेकर चर्चा तेज हो गई है, जिसके चलते केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच बयानों का आदान-प्रदान हो रहा है।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने IDBI बैंक को बेचने के केंद्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि सरकार सार्वजनिक संपत्तियों को ऐसे बेच रही है, जैसे कोई "एंड-ऑफ-सीज़न सेल" (सीज़न के अंत में लगने वाली सेल) चल रही हो। गौरतलब है कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस टिप्पणी का जवाब दिया है।
**60.7 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की योजना**
फिलहाल, केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के पास मिलकर IDBI बैंक की लगभग 94 प्रतिशत हिस्सेदारी है। अब वे बैंक में अपनी 60.7 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में अखिलेश यादव का बयान सामने आया है। आइए देखते हैं कि उन्होंने क्या कहा है।
**X पर अखिलेश यादव की पोस्ट**
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने सरकार के फैसले की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP सार्वजनिक संपत्तियों को ऐसे बेच रही है, जैसे कोई "एंड-ऑफ-सीज़न सेल" चल रही हो। उन्होंने यह भी दावा किया कि BJP सत्ता से बाहर होने से पहले इन संपत्तियों को बेचने की जल्दबाजी कर रही है।
**निर्मला सीतारमण का जवाब**
महत्वपूर्ण बात यह है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इन आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने अखिलेश यादव को UPA सरकार के दौर की याद दिलाई और बताया कि 2004 से 2014 के बीच समाजवादी पार्टी ने UPA प्रशासन का समर्थन किया था। उन्होंने सवाल किया कि उस समय समाजवादी पार्टी (SP) और उसके सहयोगियों ने कोई चिंता क्यों नहीं जताई, जबकि उस दौर में भी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की हालत खराब थी। निर्मला सीतारमण ने आगे आरोप लगाया कि UPA सरकार के कार्यकाल के दौरान, बैंकों ने राजनीतिक दबाव में आकर कर्ज दिए थे। उन्होंने बताया कि IDBI बैंक ने भी कई लोगों को कर्ज दिए थे, लेकिन अभी तक मूल रकम और ब्याज की पूरी वसूली नहीं हो पाई है।
वित्त मंत्री ने और क्या कहा?
वित्त मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने बैंकों की स्थिति सुधारने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। सरकार ने न केवल इन बैंकों में पूंजी डाली, बल्कि फंसे हुए कर्ज (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स) की वसूली पर भी ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि इन जरूरी कदमों की बदौलत, पहले के मुकाबले IDBI बैंक और अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की स्थिति काफी मजबूत हुई है।