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इमाम उमर अहमद की दो टूक, मुझसे नफरत करने वाले पाकिस्तान जाएं
-प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने पर दिया फतवा, जान से मारने की मिली धमकी
नई दिल्ली। अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के चीफ इमाम डॉ. इमाम उमेर अहमद इलियासी के खिलाफ फतवा जारी हुआ है, इतना ही नहीं उनको जान से मारने की धमकी भी दी जा रही है, लेकिन इमाम उमर अहमद का कहना है कि मैंने देश और सौहार्द का पैगाम दिया है, फतवा जारी कर मुझसे नफरत करने वाले पाकिस्तान चले जाए। बता दें कि वीवीआईपी मेहमानों में शामिल डॉ. इमाम उमेर अहमद इलियासी के खिलाफ फतवा रविवार को जारी किया गया था और राम मंदिर कार्यक्रम के बाद से ही उन्हें धमकी भरे फोन आ रहे हैं।
डॉ. इमाम उमेर अहमद इलियासी ने बताया कि उन्हें मुख्य इमाम के तौर पर सोमवार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की ओर से आमंत्रित किया गया है। दो दिनों तक विचार करने के बाद देश और सौहार्द्र के लिए अयोध्या समारोह में शामिल होने का निर्णय लिया गया था। उनके मुताबिक फतवा रविवार को जारी किया गया था और 22 जनवरी की शाम से ही उन्हें धमकी भरे फोन आने शुरू हो गए थे। इस्लामिक धर्मगुरु ने दावा किया कि प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भाग लेने के बाद से उन्हें विरोध और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि मैंने कुछ कॉल रिकॉर्ड किए हैं, जिनमें कॉल करने वालों ने मुझे जान से मारने की धमकियां दी हैं। जो लोग मुझे और देश से प्यार करते हैं, वो मेरा समर्थन करेंगे। जो लोग समारोह में शामिल होने की वजह से मुझसे नफरत करते हैं, वो पाकिस्तान चले जाएं। मैंने प्यार का पैगाम दिया है। कोई गुनाह नहीं किया। मैं माफी नहीं मांगूंगा और न ही इस्तीफा दूंगा। धमकी देने वाले जो चाहें कर सकते हैं। उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि यहां पर राष्ट्र प्राथमिकता है, इसे नए भारत के चेहरे के रूप में परिभाषित किया गया है, जहां मानवता को सबसे बड़ा धर्म माना जाता है।
, राम मंदिर जाने से पहले और अपना बयान देने से पहले क्या यह ख्याल नहीं आया कि तुम मौलाना जमील इलियासी के बेटे और मेवात के जाने-माने उपदेशक परिवार से हो? अरे नादान, तुम कब से इमामों के सरदार बन गए? हिंदुओं की नजर में अच्छा बनना था। हिंदुओं को खुश करने के लिए गए थे। कोई भी इंसान तब तक सच्चा मुसलमान नहीं बन सकता जब तक उसके अंदर पूरी इंसानियत न हो। फिर यह कहना कि सबसे बड़ा धर्म मानवता है, इसकी इजाजत कहां तक दी जा सकती है? सम्मान पाने के लिए मंदिर के उद्घाटन में क्यों शामिल हुए?। फतवे में इमाम के खिलाफ कई और व्यक्तिगत टिप्पणियां भी की गई हैं।
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