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स्पेनिश कवि लोर्का के काव्य संग्रह सांड से युद्ध और मौत का हुआ लोकार्पण
नई दिल्ली,। हाल ही में स्पेन की कविताओं का हिंदी में अनुवादित काव्य संग्रह सांड से युद्ध और मौत का लोकार्पण हुआ है। यह संग्रह स्पेन के मशहूर कवि फेदेरिको गार्सिया लोर्का की कविताओं का है। बता दें कि हिंदी के चर्चित कवि और पत्रकार, अनुवादक प्रभाती नौटियाल ने लोर्का की 75 कविताओं का हिंदी में अनुवाद किया है। ‘सांड से युद्ध और मौत’ नाम काव्य संग्रह रज़ा फाउंडेशन के सहयोग से सेतु प्रकाशन ने छापा है। विगत दिनों भारत में स्पेन के राजदूत खोसे मारिया रिदाओ और प्रसिद्ध कवि तथा संस्कृति कर्मी अशोक वाजपेयी ने ‘सांड से युद्ध और मौत’
काव्य संग्रह का लोकार्पण किया। गौरतलब है कि प्रभाती नौटियाल पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने ने मूल भाषा से लोर्का का हिंदी में अनुवाद किया है। वह पिछले 40 साल से लोर्का की कविताओं का अनुवाद कर रहे हैं। उनका लोर्का की कविताओं का पहला अनुवाद अपने समय की मशहूर पत्रिका ‘दिनमान’ में 1975 में रघुवीर सहाय ने छापा था।
बता दें कि लोर्का सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के समकालीन थे और मात्र 38 वर्ष की आयु में ही उनका निधन हो गया। लोर्का का निधन मुंशी प्रेमचंद के निधन के करीब दो सप्ताह बाद 18 अगस्त, 1936 में हुआ था। दरअसल लोर्का की हत्या कर दी गई थी लेकिन इतना कम समय जीने वाला कवि अमर हो गया। वह नाजिम हिकमत, पाब्लो नेरुदा, ब्रेख्त और रिल्के की तरह हिंदी प्रेमियों में लोकप्रिय हैं। ‘सांड से युद्ध और मौत’ काव्य संग्रह के लोकार्पण समारोह की खासियत यह रही कि अवनि ज्याल जैसी एक छोटी बच्ची ने इस पुस्तक का न केवल आवरण बनाया बल्कि उसने मंच पर जाकर लोकार्पण के लिए अतिथियों को पुस्तक की प्रतियां भेंट कीं।
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