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बसंत पंचमी पर अहलान मोदी कहकर पीएम का दुबई में होगा स्वागत
-सरस्वती पूजा के दिन यूएई में होगा हिन्दू विशाल हिंदू मंदिर का उद्घाटन
नई दिल्ली,। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी महीने संयुक्त अरब अमीरात के दौरे पर जाएंगे। यहां वह एक विशाल भारतीय समुदाय की सभा को संबोधित करने के साथ ही बसंत पंचमी के अवसर पर एक बड़े हिंदू मंदिर का उद्घाटन करेंगे। बता दें कि इसको लेकर भारतीय मिशन के अधिकारी तैयारियों में जुटे हुए हैं। मिली जानकारी के मुताबिक पीएम मोदी 13 फरवरी को अबू धाबी के शेख जायद स्टेडियम में भारतीय समुदाय के कार्यक्रम अहलान मोदी (हैलो मोदी) को संबोधित करेंगे। उसके बाद 14 फरवरी को यूएई की राजधानी में बीएपीएस में हिंदू मंदिर में समापन समारोह में शामिल होंगे। बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था की प्रेस रिलीज में कहा गया है कि धार्मिक परिसर का निर्माण पूरा होने के करीब है। परम पावन महंत स्वामी महाराज और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 फरवरी 2024 को मंदिर का उद्घाटन करने वाले हैं। हालांकि पीएम मोदी की यूएई यात्रा की अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
वहीं अहलान मोदी कार्यक्रम के बारे में संयुक्त अरब अमीरात में भारत के राजदूत संजय सुधीर ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि स्वागत समारोह स्थल पर हजारों की संख्या में लोग जुटेंगे। इससे पहले प्रधान मंत्री मोदी ने 22 सितंबर, 2019 को टेक्सास के ह्यूस्टन में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ हाउडी, मोदी! सामुदायिक कार्यक्रम को संबोधित किया था। यूएई के कार्यक्रम को सुचारू बनाने के लिए एक रजिस्ट्रेशन पोर्टल स्थापित किया गया है और लोगों को कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने के लिए ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था की गई है। यह कार्यक्रम यूएई में 150 भारतीय सामुदायिक संगठनों द्वारा मिलकर आयोजित किया जा रहा है।
राजस्थान और गुजरात के कारीगरों ने तैयार किया मंदिर
प्रधानमंत्री मोदी जिस मंदिर का उद्घाटन करेंगे, उसे तीन साल के दौरान राजस्थान और गुजरात के दो हजार से ज्यादा कारीगरों ने तैयार किया है। यूएई में भारतीय राजदूत सुधीर ने कहा कि हाल के वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों में सबसे महत्वपूर्ण विकासों में से एक अबू धाबी में बीएपीएस हिंदू मंदिर का निर्माण है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी द्वारा 14 फरवरी को मंदिर के उद्घाटन की उम्मीद है। अबू धाबी के बाहरी इलाके में एक पहाड़ी की चोटी पर बना मंदिर हमारे पूर्वजों महात्मा गांधी और शेख जायद की आकांक्षा के अनुसार शांति और सहिष्णुता की परंपरा का एक बड़ा प्रमाण होगा।
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