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मप्र के कर्मचारी मकान भाड़ा-वाहन भत्ता न बढऩे से नाराज
- 12 साल से नहीं बढ़े भत्ते, 22 दिन 20 किमी की दूरी 200 रुपए में कैसे तय करें कर्मचारी
भोपाल । मध्य प्रदेश में पिछले 12 साल में चार सरकारें बदल गईं, पर नहीं बदला तो कर्मचारियों के गृहभाड़ा और वाहन भत्ते का स्लैब। उन्हें आज भी मूल वेतन का 3 प्रतिशत (1075 रुपए) गृहभाड़ा भत्ता और 200 रुपए वाहन भत्ता दिया जा रहा है। यदि भोपाल की ही बात करें, तो मध्य से चार दिशाओं में लगभग 10 किमी शहर की सीमा है। ऐसे में कर्मचारियों को महीने में करीब 22 दिन अपने ऑफिस तक 10 किमी जाना और इतना ही लौटकर घर पहुंचना होता है। अब सवाल है कि 200 रुपए में यह दूरी कैसे पूरी की जा सकती है?
तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेश सचिव उमाशंकर तिवारी बताते हैं कि सितंबर 2012 में तत्कालीन शिवराज सरकार ने गृहभाड़ा भत्ता मूलवेतन का 3 प्रतिशत और 200 रुपए वाहन भत्ता तय किया था। तब से कर्मचारियों को यही दिया जा रहा है। जबकि केंद्रीय कर्मचारियों को 2628 रुपए वाहन भत्ता दिया जा रहा है। इस हिसाब से देखें, तो राज्य के कर्मचारियों को प्रति माह 2428 रुपए का नुकसान हो रहा है। ऐसे ही गृहभाड़ा भत्ते में 2185 से 9594 रुपए महीने का नुकसान है।
राज्य के कर्मचारियों को वर्ष 2016 से सातवां वेतनमान दिया जा रहा है, पर गृहभाड़ा और वाहन भत्ता छठवें वेतनमान के हिसाब से ही मिल रहा है। इसलिए 1075 रुपए गृहभाड़ा भत्ता मिल रहा है। भोपाल ही क्या मध्य प्रदेश के किसी भी शहर में 1075 रुपए में एक कमरा भी नहीं मिलेगा। बता दें कि केंद्रीय कर्मचारियों को 18 प्रतिशत और राज्य के कर्मचारियों को 3 प्रतिशत गृहभाड़ा भत्ता दिया जा रहा है। राज्य के कर्मचारियों का कहना है कि जब केंद्रीय और राज्य के कर्मचारियों को दिए जाने वाले भत्ते में असमानता है, तो महंगाई की दर भी दोनों के लिए अलग-अलग होनी चाहिए। जिस दाम में केंद्रीय कर्मचारी वस्तु खरीदते हैं, हम भी उसी दाम में खरीद रहे हैं, तो भत्तों में बराबरी क्यों नहीं की जा रही? गृहभाड़ा, वाहन भत्ते के साथ कई और मांगों को लेकर राज्य के कर्मचारी आंदोलित हो रहे हैं। वे लोकसभा चुनाव से पहले ऐसे सभी मुद्दों को लेकर सडक़ पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं। कई कर्मचारी संगठनों ने 4 प्रतिशत महंगाई भत्ता नहीं देने को लेकर बिगुल फूंक दिया है। 9 फरवरी को कर्मचारी शक्ति प्रदर्शन भी करने की तैयारी कर चुके हैं।
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