दिल्ली में तुर्कमान गेट हिंसा मामले में कई खुलासे हो रहे हैं, जो सभी एक बड़ी साज़िश की ओर इशारा कर रहे हैं। पुलिस ने अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया है। अब तक जो सामने आया है, वह इस प्रकार है:
दिल्ली में तुर्कमान गेट के आसपास के इलाकों में कोर्ट के आदेश पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद हुई झड़पों और पत्थरबाज़ी के बाद भड़की हिंसा के सिलसिले में एक नाबालिग समेत 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में अपनी कार्रवाई तेज़ कर दी है। इस हिंसा के सिलसिले में कल (गुरुवार) गिरफ्तार किए गए छह लोगों की पहचान अफ़ान, आदिल, शाहनवाज़, हमज़ा, अथर और उबैद के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि ये सभी आरोपी तुर्कमान गेट इलाके के रहने वाले हैं।
पुलिस का बयान
सभी आरोपियों को दिल्ली की एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जिसने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। उनकी ज़मानत याचिका पर सुनवाई बाद में होगी। एडिशनल कमिश्नर ऑफ़ पुलिस, सेंट्रल, नितिन वलसन ने कहा कि हिंसा वाली जगह पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और पूरे इलाके में पर्याप्त पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स तैनात की गई है। यह हिंसा मंगलवार और बुधवार की रात को रामलीला मैदान इलाके में फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद के पास बुलडोज़र से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान भड़की थी।
जांच में अब तक क्या सामने आया है?
तुर्कमान गेट हिंसा मामले में भीड़ ने पुलिस और MCD टीम को निशाना बनाया, जिसमें SHO समेत पांच पुलिस अधिकारी घायल हो गए। जांच में पता चला कि सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलाई गईं कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान मस्जिद को गिराया जा रहा है। जैसे ही ये अफवाहें फैलीं, बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए और भीड़ हिंसक हो गई।
पुलिस का दावा है कि पुलिस टीम पर हमला करने, पत्थर और कांच की बोतलें फेंकने में 150 से 200 लोग शामिल थे। ऑपरेशन के दौरान लगभग 36,000 वर्ग फुट का अवैध अतिक्रमण हटाया गया, लेकिन मस्जिद को कोई नुकसान नहीं हुआ। पुलिस घटना से संबंधित 450 वीडियो क्लिप की समीक्षा कर रही है, जिसमें CCTV कैमरों, ड्रोन, बॉडीकैम और सोशल मीडिया पर अपलोड किए गए वीडियो शामिल हैं, और लगभग 30 लोग जांच के दायरे में हैं।
जांच में पता चला है कि चार से पांच व्हाट्सएप ग्रुप और 10 सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के ज़रिए अफवाहें फैलाई गईं। जांच में यह भी सामने आया है कि इन अफवाहों का एकमात्र मकसद हिंसा भड़काना था। इस बीच, हिंसा के दौरान मौके पर मौजूद समाजवादी पार्टी के सांसद महबूबुल्लाह नदवी की भूमिका की भी जांच की जा रही है, और पुलिस उनसे पूछताछ के लिए उन्हें बुला सकती है। पुलिस का कहना है कि वायरल वीडियो फुटेज में उनके समर्थक पुलिस के साथ झड़प करते दिख रहे हैं।