केंद्र सरकार ने डिजिटल अरेस्ट के मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है। सरकार ने बताया है कि उसने एक हाई-लेवल इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी बनाई है।
केंद्र सरकार ने डिजिटल अरेस्ट मामलों पर अपनी स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में जमा कर दी है। केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि इस मामले की जांच अब CBI को सौंप दी गई है। CBI ने इस मामले में एक नई FIR दर्ज की है और अपनी जांच शुरू कर दी है। सरकार ने कोर्ट को बताया कि डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों से निपटने के लिए एक मज़बूत और असरदार प्लान बनाने में कुछ समय लगेगा। इसलिए, केंद्र सरकार ने कोर्ट से एक महीने का समय मांगा है।
हाई-लेवल इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी का गठन
केंद्र सरकार ने यह भी बताया कि गृह मंत्रालय ने डिजिटल अरेस्ट की समस्या से निपटने के लिए एक हाई-लेवल इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी बनाई है। यह कमेटी अलग-अलग विभागों के साथ काम कर रही है और जनता से मिले सुझावों पर भी विचार कर रही है।
कमेटी में क्या खास होगा?
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है और बताया है कि गृह मंत्रालय ने देश में डिजिटल अरेस्ट के मुद्दे के सभी पहलुओं की गहराई से जांच करने के लिए एक हाई-लेवल इंटर-डिपartmental कमेटी बनाई है। इस कमेटी की अध्यक्षता गृह मंत्रालय के स्पेशल सेक्रेटरी (इंटरनल सिक्योरिटी) कर रहे हैं। इसके सदस्यों में MeitY, DoT, MEA, डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज, कानून और न्याय मंत्रालय, उपभोक्ता मामले मंत्रालय, RBI के जॉइंट सेक्रेटरी लेवल के अधिकारी, CBI, NIA, दिल्ली पुलिस के IG रैंक के अधिकारी और इंडियन साइबरक्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर के मेंबर सेक्रेटरी शामिल हैं।
प्लान बनाने के लिए समय चाहिए - सरकार
सरकार का कहना है कि सभी सुझावों को ध्यान में रखते हुए एक मज़बूत प्लान बनाने के लिए समय चाहिए, ताकि भविष्य में लोगों को ऐसे ऑनलाइन फ्रॉड और धमकियों से बचाया जा सके। इस मामले की सुनवाई आज सुप्रीम कोर्ट में होनी है। याद दिला दें कि पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने CBI को डिजिटल अरेस्ट मामलों की जांच करने का आदेश दिया था।