- **यूपी चुनावों में विपक्ष को कमजोर करने की बीजेपी की योजना: 'PDA फॉर्मूले' के लिए टीम बनाने के बाद, यह नई घोषणा की गई है।**

**यूपी चुनावों में विपक्ष को कमजोर करने की बीजेपी की योजना: 'PDA फॉर्मूले' के लिए टीम बनाने के बाद, यह नई घोषणा की गई है।**

बीजेपी ने 2027 के यूपी विधानसभा चुनावों के लिए छह-सूत्रीय रणनीति बनाई है। बूथ को मज़बूत करना, सामाजिक संतुलन, लाभार्थियों तक पहुंच और 'डबल-इंजन सरकार' की उपलब्धियां चुनाव प्रचार का आधार होंगी।

बीजेपी ने यूपी विधानसभा चुनावों के लिए अपनी तैयारियां तेज़ कर दी हैं। गुरुवार (25 जून) को पार्टी ने 'PDA' फ़ॉर्मूले पर आधारित एक नई टीम की घोषणा की। अब वह संगठनात्मक ढांचे से लेकर चुनावी नैरेटिव तक सब कुछ कवर करने वाली एक व्यापक रणनीति पर काम कर रही है। सूत्रों के अनुसार, 'मिशन 2027' के लिए छह-सूत्रीय योजना तैयार की गई है, जिसमें चुनावी नैरेटिव बूथ प्रबंधन, सामाजिक संतुलन, लाभार्थियों तक पहुंच और 'डबल-इंजन सरकार' द्वारा किए गए कार्यों के इर्द-गिर्द बनाया जाएगा।

विधानसभा चुनावों से पहले, पार्टी का मुख्य ध्यान संगठनात्मक ढांचे पर रहा है। पिछले छह महीनों में, राज्य के 1.77 लाख बूथों पर बूथ समितियों का गठन और सत्यापन पूरा हो चुका है। संगठन को बूथ से लेकर ज़िला और क्षेत्रीय स्तरों तक सक्रिय किया गया है, साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं को विभिन्न बोर्डों और निगमों में ज़िम्मेदारियां भी सौंपी गई हैं। इस रणनीति के तहत, नई राज्य टीम में जाति और क्षेत्रीय संतुलन पर ज़ोर दिया गया है। OBC, दलितों, अत्यंत पिछड़ी जातियों (EBC), जाटों, महिलाओं और युवाओं को प्रतिनिधित्व देकर सही सामाजिक संतुलन बनाने की कोशिश की गई है। राज्य अध्यक्ष जल्द ही हर ज़िले में संगठन की चुनावी तैयारियों की समीक्षा करने के लिए राज्यव्यापी दौरे पर निकलने वाले हैं।

*   बूथ को मज़बूत करना और संगठन का विस्तार
*   सामाजिक समीकरण
*   योगी सरकार के कामकाज का प्रचार-प्रसार
*   लाभार्थियों तक पहुंच
*   विपक्ष के नैरेटिव का जवाब देना
*   माइक्रो-मैनेजमेंट

**'डबल-इंजन' पर दांव**

'डबल-इंजन सरकार' का नैरेटिव बीजेपी की चुनावी रणनीति की आधारशिला होगा। पार्टी केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं, बुनियादी ढांचे के विकास, कानून-व्यवस्था और लाभार्थी-उन्मुख कार्यक्रमों को चुनावी मुद्दों के तौर पर पेश करना चाहती है। रणनीति का फोकस लाखों लाभार्थियों से सीधा संपर्क, सीट-विशिष्ट माइक्रो-प्लानिंग और लगातार समीक्षा पर होगा। बीजेपी मानती है कि राम मंदिर चंदा विवाद, NEET पेपर लीक और UGC गाइडलाइंस जैसे मुद्दों ने चुनौतियां खड़ी की हैं। इसलिए, इन मुद्दों पर कार्रवाई करने के साथ-साथ, राजनीतिक मैदान और सोशल मीडिया पर विपक्ष के नैरेटिव का मुकाबला करने की भी तैयारी की गई है।

**माइक्रो-मैनेजमेंट रणनीति**

माइक्रो-मैनेजमेंट फिलहाल बीजेपी की सबसे बड़ी ताकत है। गृह मंत्री अमित शाह को माइक्रो-मैनेजमेंट का माहिर माना जाता है। बीजेपी ने इस दिशा में तैयारी शुरू कर दी है; उम्मीदवारों से लेकर अहम मुद्दों तक हर चीज़ पर सर्वे किए जा रहे हैं और नतीजों के आधार पर भविष्य की रणनीतियां तय की जाएंगी।


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