दक्षिण एशियाई मामलों के जानकार और अमेरिका में रहने वाले एनालिस्ट माइकल कुगेलमैन ने कहा कि ब्रिक्स समिट में जारी 'नई दिल्ली घोषणापत्र' भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी है।
नई दिल्ली में हुए ब्रिक्स समिट के पहले दिन एक संयुक्त घोषणापत्र जारी करके भारत ने एक बार फिर दुनिया के मंच पर अपनी कूटनीतिक ताकत दिखाई है। अमेरिकी एनालिस्ट भी इसे देश के लिए एक बड़ी कूटनीतिक सफलता मान रहे हैं। दक्षिण एशिया पर नज़र रखने वाले अमेरिकी एनालिस्ट माइकल कुगेलमैन ने कहा कि समिट में जारी नई दिल्ली घोषणापत्र भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत है। उन्होंने बताया कि इस साल की शुरुआत में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान संयुक्त बयान जारी करने में मुश्किलें आई थीं, जिससे समिट में संयुक्त घोषणापत्र की संभावनाओं को लेकर संदेह पैदा हो गया था। हालांकि, भारत ने अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान कई चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया और आखिरकार ब्रिक्स घोषणापत्र जारी करवाने में कामयाबी हासिल की।
**यह वाकई एक मुश्किल काम था**
कुगेलमैन ने कहा, "यह भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक सफलता है, खासकर यह देखते हुए कि इस साल की शुरुआत में विदेश मंत्रियों के स्तर पर संयुक्त बयान हासिल करना नामुमकिन साबित हुआ था। यह वाकई एक मुश्किल काम था। इसलिए, यह तथ्य कि अब एक घोषणापत्र हासिल कर लिया गया है - और वह भी इन देशों के शीर्ष नेताओं के साथ - निश्चित रूप से एक बड़ी उपलब्धि है।"\
**कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा**
उन्होंने बताया कि भारत को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिनमें ईरान से जुड़ा विवाद और अमेरिकी नीतियों से जुड़े मुद्दे शामिल थे। उन्होंने कहा, "मैंने बताया था कि भारत को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। मुख्य चुनौतियों में ईरान से जुड़े विवाद के मुद्दे को संभालना और अमेरिका तथा उसकी नीतियों से जुड़े मामलों को निपटाना शामिल था।" कुगेलमैन ने आगे कहा कि घोषणापत्र का शुरुआती हिस्सा काफी हद तक ब्रिक्स के मुख्य सिद्धांतों को दोहराता है, इसलिए इसकी सामग्री अप्रत्याशित नहीं थी।
टैरिफ का ज़िक्र ट्रंप प्रशासन को नाराज़ कर सकता है
उन्होंने कहा, "घोषणापत्र का पहला हिस्सा सबसे कम आश्चर्यजनक था। इसमें मूल रूप से ब्रिक्स के मुख्य सिद्धांतों को दोहराया गया, जिन्हें जाहिर तौर पर सभी सदस्यों का समर्थन प्राप्त है।" हालांकि, उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार प्रणाली में व्यवधान, साथ ही अमेरिकी टैरिफ और प्रतिबंधों के बारे में घोषणापत्र में किए गए ज़िक्र से अमेरिकी प्रशासन में कुछ नाराज़गी हो सकती है। कुगेलमैन ने कहा, "मुझे लगता है कि वैश्विक व्यापार प्रणाली को लगे झटकों - और विशेष रूप से अमेरिकी टैरिफ और प्रतिबंधों - का ज़िक्र प्रशासन के भीतर कुछ नाराज़गी पैदा कर सकता है।" गौरतलब है कि शनिवार को ब्रिक्स नेताओं ने 'सतत विकास के लिए 2030 एजेंडा' और इसके दूरगामी, जन-केंद्रित लक्ष्यों और उद्देश्यों को संतुलित तरीके से लागू करने की दिशा में लगातार प्रयास करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। घोषणापत्र में नेताओं ने कहा कि गरीबी के सभी रूपों—जिसमें अत्यधिक गरीबी भी शामिल है—को खत्म करना सबसे बड़ी वैश्विक चुनौती है और सतत विकास के लिए यह बेहद ज़रूरी है। घोषणापत्र में कहा गया, "हम 2030 एजेंडा को नए और अनोखे, समन्वित, पर्यावरण के अनुकूल, खुले और साझा तरीके से आगे बढ़ाने के महत्व को स्वीकार करते हैं।"