संजय राउत ने मीडिया से कहा कि त्योहारों से बढ़कर देश है। विरोध प्रदर्शन तय तारीख पर ही होगा क्योंकि राहुल गांधी ने ऐसा ही फैसला लिया है; इसमें कोई बदलाव नहीं होगा। यह साफ है कि व्यापारियों की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं।
कांग्रेस पार्टी 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक 'मेगा-रैली' करने जा रही है। दिल्ली के व्यापारियों और उद्यमियों की मुख्य संस्था 'चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री' (CTI) की ओर से इस पर पुनर्विचार करने की अपील के बावजूद, विपक्ष अपने विरोध प्रदर्शन पर अड़ा हुआ है। शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने मीडिया से बातचीत में इस बात की पुष्टि की है।
राउत ने कहा कि त्योहारों से ज्यादा अहम देश है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि "असली व्यापारी" तो मोदी और शाह हैं, जिन्हें मुख्य रूप से शेयर बाजार की चिंता रहती है। यह साफ है कि त्योहारों के सीजन के बावजूद विरोध प्रदर्शन तय कार्यक्रम के अनुसार ही होगा, जिससे व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
संजय राउत ने और क्या कहा?
मीडिया से बात करते हुए संजय राउत ने कहा, "देश किसी भी त्योहार से बड़ा है। विरोध प्रदर्शन तय तारीख पर ही होगा क्योंकि राहुल गांधी ने ऐसा तय किया है। ये तथाकथित व्यापारी असल में 'BJP की संपत्ति' हैं। असली व्यापारी तो मोदी और शाह हैं; वे इसलिए बोल रहे हैं क्योंकि उन्हें शेयर बाजार में नुकसान होने का डर है।"
गौरतलब है कि कांग्रेस पार्टी और INDIA गठबंधन ने दिल्ली के रामलीला मैदान में 'वोट बचाओ-देश बचाओ' मेगा-रैली और 'दिल्ली चलो' अभियान की योजना बनाई है। इस विरोध प्रदर्शन में शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे, MNS प्रमुख राज ठाकरे, शरद पवार गुट और कांग्रेस के कई नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है।
इस मामले की पृष्ठभूमि क्या है?
दिल्ली के व्यापारियों और उद्यमियों का प्रतिनिधित्व करने वाली मुख्य संस्था 'चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री' (CTI) ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर अपील की थी कि 1 नवंबर को होने वाले विरोध प्रदर्शन को त्योहारों के सीजन के बाद के लिए टाल दिया जाए, क्योंकि इससे छोटे व्यापारियों को नुकसान होगा। CTI ने अपने पत्र में यह भी बताया है कि कनॉट प्लेस, इंडिया गेट और सेंट्रल दिल्ली में बार-बार होने वाली रैलियों, मार्च और सड़कें बंद किए जाने की वजह से दिल्ली के व्यापारियों को पहले ही लगभग 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। अगर इस तरह के विरोध-प्रदर्शन जारी रहते हैं और पुलिस सड़कें बंद करती रही, तो दिल्ली के व्यापार जगत को करीब 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है। अब ऐसा लग रहा है कि त्योहारों का मौसम भी इन्हीं विरोध-प्रदर्शनों और सड़कों की बंदी के बीच बीत जाएगा।