करणी सेना के राज शेखावत ने कहा कि सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि यूजीसी दिशानिर्देश 2026 को उनके वर्तमान स्वरूप में लागू नहीं किया जाएगा।
यूजीसी गाइडलाइंस 2026 को लेकर चल रहे विवाद के बीच 'सवर्ण महापंचायत समिति' (सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाला संगठन) और एक सरकारी प्रतिनिधिमंडल के बीच दूसरे दौर की बातचीत संपन्न हो गई है। केंद्रीय मंत्री जे.पी.नड्डा के साथ बैठक के बाद क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राज शेखावत ने एक बयान जारी कर नतीजे को सामूहिक संघर्ष और संवाद से मिली बड़ी उपलब्धि बताया.
एक्स पर एक पोस्ट में, डॉ. राज शेखावत ने कहा, "सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि यूजीसी दिशानिर्देश 2026 को उनके वर्तमान स्वरूप में लागू नहीं किया जाएगा। इन दिशानिर्देशों की फिर से जांच करने, सभी के लिए समानता सुनिश्चित करने, संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए एक समीक्षा समिति का गठन किया जाएगा।"
यूजीसी गाइडलाइन को लेकर सरकार दे आश्वासन: करणी सेना
उन्होंने आगे कहा, "सरकार ने यूजीसी दिशानिर्देशों के मुद्दे पर एक सकारात्मक और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाया है और हमें आश्वासन दिया है कि वह इस मामले को पूरी गंभीरता के साथ संबोधित करेगी। यह वही आश्वासन है जो सरकार ने 20 सितंबर को दिया था और 5 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दोहराया था। यह सफलता किसी एक व्यक्ति या संगठन की नहीं है, बल्कि उन सभी नागरिकों की है जिन्होंने न्याय, समानता और एक निष्पक्ष प्रणाली के लिए अपनी आवाज उठाई। अब हम आवश्यक संशोधनों को लागू करने के लिए एक समिति के गठन की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो यूजीसी दिशानिर्देशों की निष्पक्ष समीक्षा करेगी। 2026, और सामान्य वर्ग के कारण संवैधानिक अधिकारों और न्याय की सुरक्षा।"
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दिया आश्वासन
यूजीसी द्वारा बनाए गए नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई गुरुवार (5 नवंबर, 2026) को स्थगित कर दी गई। कार्यवाही के दौरान, केंद्र सरकार ने अदालत को सूचित किया कि वह विवादास्पद यूजीसी नियमों की फिर से जांच करेगी और इस उद्देश्य के लिए एक समिति गठित की जाएगी। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया कि दिशानिर्देशों की समीक्षा के दौरान सभी वर्गों के छात्रों के हितों को ध्यान में रखा जाएगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी वर्ग का कोई भी छात्र असंतुष्ट, असुरक्षित या भयभीत महसूस न करे।
जवाब में मुख्य न्यायाधीश ने भी टिप्पणी की कि हर छात्र के हितों की रक्षा करना जरूरी है. नियम बनाते समय देश की युवा पीढ़ी के हितों और भावनाओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।