केंद्र सरकार ने मणिपुर में जनगणना की प्रक्रिया को कुछ समय के लिए टाल दिया है, जो 1 सितंबर से शुरू होने वाली थी। यह फ़ैसला जनगणना से पहले नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़न्स (NRC) लागू करने की माँग के बाद लिया गया है।
जातीय हिंसा से प्रभावित मणिपुर में जनगणना की प्रक्रिया को फ़िलहाल टाल दिया गया है। केंद्र सरकार ने राज्य में जनगणना अभियान को टालने का फ़ैसला तब लिया, जब मणिपुर के नागरिक समाज संगठनों ने जनगणना करने से पहले नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़न्स (NRC) को अपडेट करने की माँग की। जनगणना का शुरुआती चरण—घर-घर जाकर जानकारी जुटाने का काम (हाउस-लिस्टिंग)—1 सितंबर से शुरू होने वाला था।
**अमित शाह की अध्यक्षता में उच्च-स्तरीय बैठक**
मुख्यमंत्री सचिवालय के एक बयान के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को नई दिल्ली में एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में मणिपुर के मौजूदा हालात का जायज़ा लिया गया। साथ ही, राज्य के लोगों की उस माँग पर भी चर्चा हुई जिसमें जनगणना को टालने और पहले NRC लागू करने की बात कही गई थी।
मणिपुर के लोगों की भावनाओं और उम्मीदों को ध्यान में रखते हुए, राज्य में प्रस्तावित जनगणना को कुछ समय के लिए टालने पर सहमति बनी। बैठक में मणिपुर के राज्यपाल, मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
**NRC की माँग के पीछे क्या कारण है?**
मणिपुर में NRC लागू करने की माँग मुख्य रूप से मैतेई और नागा समुदायों ने की है। इन समुदायों को डर है कि NRC के बिना जनगणना कराने से राज्य की जनसंख्या संरचना (डेमोग्राफिक कंपोज़िशन) बदल सकती है।
उनका आरोप है कि पड़ोसी देश म्यांमार से अवैध प्रवासियों के आने के कारण राज्य की जनसंख्या संरचना बदल रही है। यह भी दावा किया जाता है कि म्यांमार से आने वाले कथित अवैध प्रवासियों के कुकी समुदाय के साथ जातीय संबंध हैं।
**मुख्यमंत्री ने केंद्र का आभार जताया**
बैठक के बाद, मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केंद्र ने मणिपुर के लोगों की बात सुनी और उनकी उम्मीदों के अनुरूप फ़ैसला लिया।
मुख्यमंत्री ने मणिपुर के लोगों की माँगों को पूरा करने में लगातार सहयोग के लिए बीजेपी नेता नितिन नबीन का भी धन्यवाद किया। बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री ने 14 नागरिक समाज संगठनों के नेताओं और बीजेपी विधायकों वाले प्रतिनिधिमंडल के प्रयासों की भी सराहना की। इस प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में मणिपुर में NRC लागू करने के लिए कैंपेन करने के मकसद से नई दिल्ली का दौरा किया था।
**मामला मणिपुर हाई कोर्ट पहुंचा**
सोमवार को मणिपुर हाई कोर्ट में जनगणना को टालने का मुद्दा भी उठाया गया। सुनवाई के दौरान, केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से पेश वकीलों ने कोर्ट की डिवीज़न बेंच को जनगणना अभियान रोकने के फैसले के बारे में जानकारी दी।
इस मामले को लेकर कांगलेईपाक स्टूडेंट्स एसोसिएशन और 14 सिविल सोसाइटी संगठनों के कन्वेनर और सोशल एक्टिविस्ट शांता नाहकपाम ने याचिकाएं दायर की थीं। चीफ जस्टिस एम. मुरलीधरन और जस्टिस ए. गुनेश्वर शर्मा की डिवीज़न बेंच अब इस मामले पर अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को करेगी।
**एन. बीरेन सिंह ने इसे मणिपुर के लोगों की जीत बताया**
मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए इस फैसले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों के बयानों को रिकॉर्ड पर लिया है। उन्होंने लिखा कि मणिपुर के लोगों की जीत हुई है और मूल निवासियों की आवाज़ केंद्र सरकार तक पहुंच गई है।
**2023 से जारी है जातीय हिंसा**
मणिपुर में मई 2023 से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा जारी है। मैतेई समुदाय मुख्य रूप से घाटी वाले इलाकों में रहता है, जबकि कुकी समुदाय बड़ी संख्या में पहाड़ी जिलों में रहता है। इस हिंसा के कारण कम से कम 260 लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग बेघर हो गए हैं।
लगातार जारी जातीय संघर्ष और मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद 13 फरवरी, 2025 को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। इसे लगभग एक साल बाद, 4 फरवरी को हटा लिया गया।