आयकर विभाग ने स्क्रूटनी के नोटिस भेजना शुरू किए, कई मामले रिफंड क्लेम से जुड़े भोपाल । आयकर विभाग ने वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए स्क्रूटनी के नोटिस करदाताओं को भेजना शुरू कर दिया है। लगभग 1000 नोटिस फेसलेस प्रणाली के माध्यम से करदाताओं को भेजे गए हैं। अधिकतर नोटिस वे हैं, जिनमें करदाता ने कटे हुए टैक्स का रिफंड क्लेम किया है।
आयकर विभाग ने पिछले वर्ष लोगों को अपना रिफंड क्लेम एक बार फिर जांचने और कन्फर्म करने के लिए ईमेल किए थे। अब उन केसेस में से हाई रिफंड केसेस को स्क्रूटनी में लिया गया है।सीए पंकज शाह ने बताया इसके साथ ही इस साल की स्क्रूटनी भी शुरू हो चुकी है। इसमें कुछ करदाताओं के विरुद्ध आंशिक तो कुछ के विरुद्ध विस्तृत स्क्रूटनी की जाएगी। इसके लिए इस साल भी केस पूरी तरह डिजिटल पद्धति से चुने गए हैं।
सभी आयकर रिटर्न भरने वालों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके ईमेल पर कोई नोटिस तो नहीं आया है, जिसका जवाब न दिया गया हो। समय पर नोटिस का जवाब न देने पर 10 हजार रुपए तक की पेनल्टी भी लग सकती है। ऐसे में अधिकारी फेसलेस माध्यम से ही मांगी हुई छूट के लिए हुए रिफंड को खारिज कर टैक्स डिमांड निकल सकते हैं।.
म्यूचुअल फंड और जमीन के सौदों पर सवाल रिफंड के अलावा भी कई ऐसे मामले हैं, जिनमें विभाग द्वारा नोटिस भेजे गए हैं। प्रमुख रूप से जिन लोगों ने कर मुक्त आय रिटर्न में दर्शाई है जैसे कि कृषि से आय या विभिन्न धाराओं में छूट मांगी है, उन मामलों को भी जांचने के लिए स्क्रूटनी में लिया गया है। जिन मामलों में जीएसटी और रिटर्न में दर्शाए गए टर्नओवर में अंतर है, उन्हें भी स्क्रूटनी के लिए लिया गया है। हाई वैल्यू ट्रांजेक्शन जैसे बड़ी जमीन या संपत्ति खरीदने या बेचने पर सब रजिस्ट्रार की रिपोर्टिंग, म्यूचुअल फंड आदि में आय के अनुपात में अधिक निवेश आदि भी स्क्रूटनी के लिए चयनित प्रकरणों का आधार बने हैं। अगर किसी ने पूर्व साल की तुलना में कम आय दर्शाई है तो ऐसे मामले भी विभाग ने रेड फ्लैग किए हैं।
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