-यूक्रेन संघर्ष के जिक्र वाले दस्तावेज पर रूस की रजामंदी से खुलते दिख रहे रास्ते
नई दिल्ली । इंदौर व गोवा में जी20 बैठक के दौरान यूक्रेन युद्घ को लेकर हुए जिक्र को जब से रूस ने मान्यता दी है, तभी से पुतिन के रुख नरम दिखाई दे रहे हैं। क्योंकि अभी तक जी20 बैठक में यदि कोई यूक्रेन युद्ध की बात करता था तो रूस उससे सहमत नहीं होता था। लेकिन पहली बार इंदौर में होनेवाली बैठक के दस्तावेजों पर रूस ने सहमति जताई है। इसकी वजह पीएम मोदी की सलाह बताई जा रही है। क्योंकि लगातार मुलाकातों और फोन पर होने वाली बातों से शायद रूस को मोदी की सीख समझ आने लगी है। पीएम मोदी ने कहा था कि ये युद्ध का समय नहीं है। जी-20 की दो मंत्रिस्तरीय बैठकों में यूक्रेन संघर्ष को लेकर रूस का स्टैंड कुछ बदला-बदला सा दिखा है। 50 दिन बाद जी-20 की समिट होनी है जिसमें राष्ट्राध्यक्ष दिल्ली में जुटने वाले हैं। इससे पहले शुभ संकेत मिलते दिख रहे हैं।

अब तक रूस जी20 की किसी भी बैठक में यूक्रेन संघर्ष के जिक्र पर सहमत नहीं होता था। इसी महीने गांधीनगर में जी20 के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों की बैठकों में रूस अंतिम दस्तावेज और बैठक के अध्यक्ष के बयान से सहमत नहीं था। वह इससे अलग रहा क्योंकि तीन पैराग्राफ में युद्ध का जिक्र था। हालांकि इंदौर में श्रम मंत्रियों और गोवा में ऊर्जा मंत्रियों की बैठकों में बड़ा बदलाव दिखा। यहां पर रूस ने उस दस्तावेज को मान्यता दी जिसमें यूक्रेन संघर्ष का जिक्र था। इस तरह से यूक्रेन संघर्ष के जिक्र वाले दस्तावेज पर रूस की रजामंदी एक बड़ा घटनाक्रम है। हालांकि रूस ने यूक्रेन के हालात पर अपना अलग रुख सामने रखा है। शनिवार को गोवा में खत्म हुई ऊर्जा मंत्रियों की बैठक में उसी टेक्स्ट को दोहराया गया। रूस ने जलवायु परिवर्तन एवं अन्य मसलों से संबंधित कॉन्टेंट्स पर अपनी चिंता जताई। हालांकि यूक्रेन युद्ध के जिक्र पर वह सहमत दिखा। गोवा बैठक में ज्यादातर सदस्यों ने यूक्रेन युद्ध की कड़ी निंदा की और कहा कि इससे भारी मानवीय पीड़ा हो रही है।

दस्तावेज में बैठक के अध्यक्ष ने कहा कि ज्यादातर सदस्यों का कहना है कि युद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था में मौजूदा कमजोरियों को बढ़ा रहा है, विकास को रोक रहा है, महंगाई को बढ़ा रहा है, आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित कर रहा है। इससे ऊर्जा और खाद्य असुरक्षा बढ़ रही है। वित्तीय स्थिरता को लेकर जोखिम बढ़ रहा है। बैठक के अध्यक्ष, ऊर्जा और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मामलों के मंत्री आरके सिंह थे। बता दें कि जी-20 की अध्यक्षता इस साल भारत के पास है। दस्तावेज में कहा गया कि यूक्रेन में युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।
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उधर, चीन का कहना है कि जी-20 सुरक्षा मुद्दों के समाधान के लिए सही मंच नहीं है। उसने भूराजनीतिक-संबंधित सामग्री को शामिल करने का विरोध किया। गौरतलब है कि जी20 शिखर सम्मेलन का आयोजन नई दिल्ली में 9 और 10 सितंबर को होना है। जी20 की अध्यक्षता के तहत भारत ने 55 अलग-अलग जगहों पर 170 बैठकें आयोजित की हैं। जुलाई और अगस्त के महीनों में मंत्री स्तर पर कई बैठकें प्रस्तावित हैं। भारत जी20 शिखर सम्मेलन में जारी किए जाने वाले परिणाम दस्तावेजों पर मतभेदों को सुलझाने की कोशिश कर रहा है। यूक्रेन संघर्ष जैसे विवादास्पद मुद्दों पर जी20 देशों के बीच आम सहमति बनाने के प्रयास हो रहे है।