- विजय नायर को जमानत देने से कोर्ट का इनकार

विजय नायर को जमानत देने से कोर्ट का इनकार

नई दिल्ली। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार को उत्पाद शुल्क नीति मामले में कथित अनियमितताओं से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में विजय नायर की डिफॉल्ट जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि टिप्पणियों और निष्कर्षों के साथ आरोपित विजय नायर द्वारा दायर वर्तमान आवेदन को इस अदालत के समक्ष सुनवाई योग्य नहीं होने के कारण खारिज किया जा रहा है।
दिल्ली शराब घोटाला: विजय नायर की जमानत अर्जी पर राउज एवेन्यू कोर्ट ने  सुरक्षित रखा फैसला - delhi liquor scam vijay nair ed aam aadmi party rouse  avenue court ntc - AajTak

 विशेष न्यायाधीश एमके नागपाल ने कहा कि तथ्यात्मक और कानूनी चर्चा के मद्देनजर यह अदालत आरोपित की डिफॉल्ट जमानत के आधार पर विचार करने के लिए सक्षम या उचित मंच नहीं है और आरोपित के लिए उपलब्ध उचित रास्ता उसी न्यायाधीश या पीठ से संपर्क करना चाहिए है। विजय नायर की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन ने कहा कि पूरक अभियोजन शिकायत ईडी द्वारा 60 दिनों की निर्धारित अवधि के भीतर दायर की गई है, लेकिन यह उनके लिए जांच पूरी किए बिना ही दायर की गई है 
दिल्ली आबकारी घोटाला: अदालत ने विजय नायर को ''वैधानिक जमानत'' देने से किया  इनकार - court refuses statutory bail to vijay nair-mobile

और इसलिए उक्त पूरक शिकायत केवल इसे अधूरी शिकायत या आरोपपत्र कहा गया है। जिसे जांच एजेंसी द्वारा यू/एस 167(2) सीआरपीसी में निहित प्रावधानों के संदर्भ में आवेदक के डिफॉल्ट जमानत पर रिहा होने के अधिकार को खत्म करने के लिए दायर किया गया है। नायर के वकील ने यह भी तर्क दिया कि डिफॉल्ट जमानत पाने का अधिकार उपरोक्त प्रावधानों के अनुसार एक आरोपी को दिया गया एक वैधानिक अधिकार है और इसे जांच एजेंसी द्वारा उस तरीके से पराजित या नष्ट करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। जिस तरह इस वक्त इस मामले में की जा रही है। आगे यह भी तर्क दिया गया 
ये भी जानिए...................
Delhi Excise policy case विजय नायर को जमानत देने से कोर्ट का इनकार डिफॉल्ट  जमानत याचिका खारिज - ncr Delhi Excise policy case Rouse Avenue Court  refuses to grant bail to Vijay
कि यदि जांच एजेंसियों को उपरोक्त प्रावधानों के तहत किसी आरोपित को मिलने वाले वैधानिक जमानत के अधिकार को खत्म करने के लिए अधूरे आरोपपत्र या अभियोजन शिकायतें दाखिल करने की अनुमति दी जाती है तो आपराधिक न्यायशास्त्र का मूल ढांचा धारा 173 के रूप में नष्ट हो जाएगा। सी.आर.पी.सी. यह जांच एजेंसियों पर यह कर्तव्य लगाता है कि वे आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र या अभियोजन शिकायत तभी दर्ज करें जब किसी मामले की जांच सभी तरह से पूरी हो जाए। वहीं, ईडी ने डिफॉल्ट जमानत याचिका का विरोध करते हुए स्थिरता का आधार उठाया और कहा कि आरोपी ने पहले ही अपनी जमानत याचिका में उच्च न्यायालय के समक्ष अधूरे आरोपपत्र का आधार उठाया था।
दिल्ली आबकारी घोटाला: अदालत ने विजय नायर को 'वैधानिक जमानत' देने से इनकार  किया - Republic Bharat

Comments About This News :

खबरें और भी हैं...!

वीडियो

देश

इंफ़ोग्राफ़िक

दुनिया

Tag