- मामले में सीडीपीओ, सुपरवाईजर को किया गया सस्पेंड, महिला बाल विकास अधिकारी एवं सहायक संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी
-कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने कहा संस्था की फंडिंग के संबंध में भी जांच की जा रही
भोपाल । मप्र की राजधानी भोपाल में बिना अनुमति के चल रहे अवैध बालिका गृह से 26 बच्चियों के गायब होने का मामला सामने आने के बाद पुलिस के साथ ही अन्य जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। शासन-प्रशासन की सक्रियता के बाद लापता सभी बच्चियों को भोपाल और आसपास के क्षेत्र से बरामद किया गया है। 10 बच्चियां आदमपुर छावनी हरिपुरा, 13 बच्चियां अयोध्या बस्ती, 2 बच्चियां रूप नगर क्रेशर एरिया और एक बच्ची रायसेन से बरामद की गई है। जानकारी के अनुसार अवैध शेल्टर होम में गुजरात, झारखंड, राजस्थान, के अलावा मप्र के सीहोर, रायसेन, छिंदवाड़ा, बालाघाट के रहने वाली थी। बिना अनुमति के बालिका गृह चलाने के मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है।
राष्ट्रीय बाल आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने मामले को लेकर मप्र की मुख्य सचिव वीरा राणा को पत्र भी लिखा है। भोपाल के परवलिया थाना क्षेत्र में ये अवैध बालिका गृह चलाया जा रहा था। भोपाल में एक निजी एनजीओ के हॉस्टल (चिल्ड्रेन होम) से बच्चियों के गायब होने के बाद यह विवाद शुरू हुआ है। जिला प्रशासन ने इस मामले में पाई गई लापरवाही पर सीडीपीओ बृजेन्द्र प्रताप सिंह (वर्तमान पदस्थापना गंजबासौदा), सीडीपीओ कोमल उपाध्याय और सुपरवाईजर मंजूषा राज को सस्पेंड कर दिया गया है। साथ ही महिला बाल विकास अधिकारी सुनील सोलंकी एवं सहायक संचालक महिला बाल विकास रामगोपाल यादव को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
आंचल नाम के इस हॉस्टल में कुल 68 बच्चियां रजिस्टर्ड हैं। शुक्रवार को जब राज्य बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों ने यहां निरीक्षण किया तो 68 में से 41 बच्चियां ही मौके पर मिलीं। जिसकी शिकायत पर परवलिया पुलिस ने शनिवार को हॉस्टल संचालक और पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव वीरा राणा से सात दिन में जांच रिपोर्ट मांगी है। इधर लापरवाही बरतने पर परियोजना अधिकारी समेत तीन लोगों को सस्पेंड कर दिया गया है। रेस्क्यू की गई 6 से 18 साल तक की बच्चियों में 3 मुस्लिम, 3 क्रिश्चियन और 35 हिंदू हैं।
शनिवार को ही एसपी और कलेक्टर ने भी हॉस्टल का दौरा किया। जिला पंचायत सीईओ ऋतुराज सिंह भी चिल्ड्रन होम का निरीक्षण करने पहुंचे। एसपी प्रमोद कुमार सिन्हा ने बताया कि प्राथमिक जांच और पूछताछ में ये सामने आया कि जिन 26 बच्चियों के लापता होने की बात की जा रही है। वे रजिस्ट्रेशन के बाद मन नहीं लगने से अपने परिवार के पास चली गईं है। जिसका सत्यापन करा रहे हैं।
एसपी ने ये भी बताया कि बच्चियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अब तक की जांच में बच्चियों के साथ किसी प्रकार के यौन उत्पीडऩ और मारपीट संबंधी बात सामने नहीं आई है। सभी पहलुओं पर मामले की जांच की जा रही है। आंचल चिल्ड्रन होम का संचालन अवैध तरीके से किया जा रहा था। इसी आधार पर एफआईआर दर्ज की गई है।
मामले में महिला एवं बाल विकास विभाग, परियोजना अधिकारी कोमल उपाध्याय और सुपरवाइजर मंजूषा राज को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, महिला एवं बाल विकास विभाग गंजबासौदा के परियोजना अधिकारी बृजेंद्र प्रताप सिंह को भी सस्पेंड किया है। वे पूर्व में भोपाल में पदस्थ थे।
बाल विकास आयोग की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि बाल गृह रजिस्टर्ड नहीं था। साथ ही यहां जो बच्चियां रेस्क्यू करके लाई गई थी, उनकी जानकारी सीडब्ल्यूसी को नहीं दी गई थी। न ही शासकीय प्रक्रिया का पालन किया गया था। इसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। आयोग के निरीक्षण के दौरान उपस्थित मिली 41 बच्चियों को प्रशासन द्वारा रजिस्टर्ड बाल गृह में शिफ्ट कर दिया गया है।