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झारखंड हाईकोर्ट ने किस केस में किया ऋग्वेद, यजुर्वेद, मनुस्मृति का जिक्र
रांची,। झारखंड हाईकोर्ट ने एक महिला के अपने पति से गुजारा-भत्ता मांगने से जुड़े मामले में आदेश सुनाकर धार्मिक ग्रंथों का उल्लेख किया है। न्यायमूर्ति सुभाष चंद ने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को उद्धृत करते हुए विचार व्यक्त किया कि भारत में महिलाएं किस तरह शादी के बाद पति के परिवार में रहने आती हैं।
न्यायमूर्ति चंद ने आदेश में ऋग्वेद, यजुर्वेद, मनुस्मृति के उद्धरणों का भी वर्णन किया और टेरेसा चाको की पुस्तक ‘इंट्रोडक्शन ऑफ फेमिली लाइफ एजुकेशन’ का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों में बेटा शादी के बाद अपने परिवार से अलग हो जाता है, लेकिन भारत में ऐसा नहीं है। न्यायमूर्ति चंद ने कहा कि पत्नी को विवाह के बाद अपने पति के परिवार के साथ रहना होता है, जब तक उनके अलग होने का कोई मजबूत न्यायोचित कारण नहीं हो।
मामला रुद्र नारायण राय द्वारा हाल में दायर याचिका से जुड़ा है जिसमें उनकी पत्नी और नाबालिग बेटे को गुजारा भत्ता दिये जाने के दुमका की एक कुटुम्ब अदालत के आदेश को चुनौती दी गई थी।
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