सोना 1.47 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2.11 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई है। आइए जानते हैं कि आने वाले हफ्ते में कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की वैल्यू और डॉलर का इन कीमतों पर क्या असर पड़ सकता है।
आने वाले हफ्ते में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की कीमतों का 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचना और रुपये की चाल, इन कीमती धातुओं के ट्रेंड को तय कर सकती है। पिछले हफ्ते सोने और चांदी दोनों की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई; अब निवेशक इस बात पर नज़र रखेंगे कि क्या कीमतें वापस ऊपर आती हैं या फिर गिरावट का दौर जारी रहता है।
जानकारों के अनुसार, चीन और अमेरिका के आर्थिक आंकड़े, डॉलर की चाल और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, सोने और चांदी की कीमतों पर असर डाल सकते हैं। अगर आप सोना या चांदी खरीदने की सोच रहे हैं, तो आने वाले हफ्ते में बाजार की हलचल पर नज़र रखना ज़रूरी है। आप यहाँ सोने और चांदी के ताज़ा भाव देख सकते हैं।
क्या सोना और चांदी सस्ते हो गए हैं?
पिछले हफ्ते घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। MCX पर सोने की कीमत 3,581 रुपये (यानी 2.4%) गिरकर लगभग 1.47 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई।
चांदी की कीमतों में और भी बड़ी गिरावट आई; इसकी कीमत 14,568 रुपये (यानी 6.4%) गिरकर लगभग 2.11 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई। इस गिरावट के पीछे रुपये का मजबूत होना, ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और वैश्विक बाजारों में बदलती स्थितियां जैसे कारण रहे।
भारत में सोना सस्ता क्यों हुआ है?
सोने की कीमतों में गिरावट का एक बड़ा कारण भारतीय रुपये का मजबूत होना है। रुपया मजबूत होने से विदेशों से सोना आयात करने की लागत कम हो जाती है, जिसका असर घरेलू बाजार की कीमतों पर पड़ता है। जानकारों के अनुसार, पांच ट्रेडिंग सत्रों में रुपया 96.8 के स्तर से मजबूत होकर 94.8 पर आ गया—यानी इसमें 180 पैसे से ज़्यादा की मजबूती आई। रुपये में आई इस मजबूती के कारण, घरेलू बाजार में सोने की कीमत चार कारोबारी सत्रों में ₹3,000 प्रति 10 ग्राम से ज्यादा गिर गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार के मुकाबले भारत में सोने की कीमतों में कहीं ज्यादा गिरावट देखने को मिली।
चांदी में इतनी ज्यादा उतार-चढ़ाव क्यों है?
पिछले हफ्ते, सोने की तुलना में चांदी की कीमतों में कहीं ज्यादा गिरावट आई। ऐसा इसलिए है क्योंकि चांदी का इस्तेमाल न केवल निवेश के लिए, बल्कि कई तरह के व्यावसायिक और औद्योगिक कामों में भी किया जाता है। नतीजतन, आर्थिक विकास को लेकर चिंताएं चांदी की मांग और उसकी कीमत पर कहीं ज्यादा गहरा असर डाल सकती हैं।