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पैरा खेलों के विकास में केन्द्र सरकार की अहम भूमिका : कोच
नई दिल्ली । भारतीय पैरा-बैडमिंटन कोच गौरव खन्ना ने देश में पैरा खेलों के विकास का श्रेय मौजूदा सरकार को दिया है। प्रमोद भगत, रोहित भाकर, जैसी शीर्ष खिलाड़ियों के कोच खन्ना ने कहा कि केन्द्र सरकार पैरा खिलाड़ियों के लिए अभिभावक जैसी भूमिका निभा रही है। खन्ना ने कहा, ‘‘ मैं इस बात से बहुत संतुष्ट हूं कि पैरा खेलों में हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इसका श्रेय सरकार को जाता है। वह पैरा-एथलीटों पर काफी ध्यान दे रही है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ प्रधानमंत्री बड़ी स्पर्धाओं में भाग लेने जाने वाले खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाते है और सर्वश्रेष्ठ करने के लिए प्रेरित करते है। जब ये खिलाड़ी पदक जीत कर लौटते है तो वह उन्हें पार्टी देते है। वह उनके लिए एक अभिभावक की तरह हैं।’’
गौरतब है कि भारतीय पैरा बैडमिंटन खिलाड़ियों ने हांगझोउ एशियाई खेलों में 21 पदक जीते थे। भारतीय पैरा बैडमिंटन के सफल होने में कोच खन्ना की अहम भूमिका रही है। खन्ना बचपन से ही बैडमिंटन खिलाड़ी बनना चाहते थे लेकिन घुटने की सर्जर के बाद पेशेवर खिलाड़ी के तौर पर खेल जारी नहीं रख पाये। उन्होंने हालांकि अपने जुनून का पालन किया और बैडमिंटन से जुड़े रहे। उन्होंने दिव्यांग बच्चों को कोचिंग देना शुरू किया। खन्ना ने अपने जुनून और समर्पण से पैरा-बैडमिंटन को देश में सुर्खियों में ला दिया हो, लेकिन यह कोई आसान काम नहीं था। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्हें शून्य से शुरुआत करनी पड़ी। जमीनी स्तर पर एक मजबूत टीम बनाने में उत्तर प्रदेश के पूर्व खेल मंत्री दिवंगत चेतन चौहान ने उनकी काफी मदद की।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे एहसास हुआ कि भारतीय पैरा-बैडमिंटन में कोई उचित या ठोस जमीनी स्तर की व्यवस्था नहीं है। मैंने कई लोगों से मदद मांगी। चेतन चौहान की मदद से लखनऊ के स्पोर्ट्स कॉलेज में इस खेल को शुरू किया।’’उन्होंने कहा, ‘‘हमने खराब हालातों के बावजूद परिणाम देना शुरू किया और कुछ प्रायोजकों से मदद मिलने के बाद हम दूसरी जगह चले गए।’’ लखनऊ में द्रोण पैरालंपिक हाउस की स्थापना के बाद चीजें ठीक हुई। यह स्थल अब पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ियों के लिए बेहतरीन प्रशिक्षण स्थल के तौर पर उभरा है।
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