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शव के साथ प्रदर्शन पर सजा, खटटर सरकार का जन विरोधी फैसला : सैलजा
चंडीगढ़ । कांग्रेस कमेटी की महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री, कांग्रेस कार्य समिति की सदस्य, हरियाणा कांग्रेस की पूर्व प्रदेशाध्यक्ष एवं उत्तराखंड की प्रभारी कुमारी सैलजा ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के मृत शरीर पर उसके परिजनों का अधिकार होता है, लेकिन हरियाणा में भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार ने इस अधिकार को भी छीन लिया है। शव के साथ प्रदर्शन पर सजा का मंत्रिमंडल का फैसला पूरी तरह से जन विरोधी है। कुमारी सैलजा ने कहा कि भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार चुनावों में संभावित हार के चलते बौखला चुकी है। इसलिए ही द हरियाणा ऑनरेबल डिस्पोजल ऑफ डेड बॉडी बिल-2024 को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी है।
इस बिल में शव के साथ प्रदर्शन, धरना या रोड जाम करने पर 06 माह से 05 साल तक कैद व एक लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इससे साफ है कि सरकार नहीं चाहती कि सरकारी तंत्र की वजह से होने वाली मौत पर मृतक के परिजन न्याय के लिए अपनी आवाज उठा सकें। धार्मिक मान्यताओं के साथ तुरंत अंतिम संस्कार करने की बजाए शव के साथ प्रदर्शन या धरना लोग मजबूरी में देते हैं। मृतक के साथ हुए अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का यह सिर्फ एक तरीका मात्र है।
कांग्रेस नेत्री कुमारी सैलजा ने कहा कि कई बार लोग निजी या सरकारी अस्पताल में हुए गलत इलाज के खिलाफ आवाज उठाने के लिए शव को साथ लेकर प्रदर्शन करते हैं, तब कई बार पुलिस हिरासत में हुई मौत के खिलाफ अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए ऐसा करते हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसी भी व्यक्ति से उनसे परिजन के शव को छीन कर अंतिम संस्कार करना धार्मिक मान्यताओं के भी खिलाफ है, जबकि ऐसा प्रावधान बिल में कर दिया गया है। यह कानून लागू होने के बाद लोगों पर न सिर्फ पुलिसिया अत्याचार बढ़ेगा, बल्कि अस्पतालों में भी इलाज में लापरवाही के मामले बढ़ने की संभावना है।
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