- आपराधिक मानहानि को क्रिमिनल लॉ में रखने की जरूरत: लॉ कमीशन

आपराधिक मानहानि को क्रिमिनल लॉ में रखने की जरूरत: लॉ कमीशन

-पब्लिक प्रॉपर्टी के नुकसान की भरपाई पर ही आरोपी को ‎मिलेगी जमानत
नई दिल्ली,। आपराधिक मानहानि का मामला क्रिमिनल लॉ में रखने के ‎लिए लॉ कमिशन ने सिफारिश की है। इस पर लॉ कमीशन का कहना है ‎कि इससे फर्जी और झूठे आरोपों और बयान देने वालों में डर बना रहेगा। साथ ही लॉ कमिशन ने अपनी एक अन्य सिफारिश में कहा है कि पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाने वालों को तभी जमानत मिले जब वह नुकसान की भरपाई के लिए उतनी रकम जमा कर दें। दरअसल लॉ कमिशन ने 284 वीं और 285 वीं रिपोर्ट में ये सिफारिशें की हैं। लॉ कमिशन ने अपनी 284 वीं रिपोर्ट में कहा है कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में आरोपी को तभी जमानत मिलनी चाहिए जब वह नुकसान के बराबर की राशि जम कर दे।




 जस्टिस रितु राज अवस्थी की अगुवाई वाले लॉ कमिशन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाए जाने से सरकार के राजस्व का नुकसान होता है। सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाए जाने से सरकारी राजस्व को नुकसान और लोगों को इस कारण परेशानी होती है। इस मामले में लॉ कमिशन ने तमाम जजमेंट और मसले की गंभीरता को देखते हुए लॉ कमिशन ने प्रीवेंशन ऑफ डैमेज ऑफ पब्लिक प्रोपर्ट एक्ट 1984 में बदलाव की सिफारिश की है।





ला कमीशन का कहना है ‎कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में जमानत के प्रावधान कड़े किए जा सकते हैं। इसके लिए नुकसान जितने का हुआ है उसके बराबर की राशि जमा करने पर ही जमानत हिनी चा‎हिए। ऐसा माना जा रहा है कि ऐसे कड़े प्रावधान करने से लोग अपराध करने से बचेंगे। लॉ कमिशन ने अपनी 285 वीं रिपोर्ट में यह भी सिफारिश की है कि क्रिमिनल मानहानि का मामला क्रिमिनल लॉ में बने रहना चाहिए। विचार और अभिव्यक्ति का जो अधिकार है वह लोगों को संविधान के तहत मिला हुआ है वहीं दूसरी तरफ लोगों को गरिमा के साथ जीने का अधिकार मिला हुआ है और अनुच्छेद-21 के तहत यह अधिकार लोगों को मिला हुआ है। 
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लॉ कमीशन ने कहा ‎कि समाज में शांति और सौहार्द बना रहे इसके लिए प्रावधान किए गए हैं। कोई भी अधिकार पूर्ण नहीं है। लोगों की गरिमा और मान प्रतिष्ठा को प्रोटेक्ट करने के लिए आराधिक मानहानि का अपराध कानून के किताब में है। यह जरूरी है कि लोगों की गरिमा और प्रतिष्ठा को प्रोटेक्ट किया जाए और कोई किसी और की प्रतिष्ठा का हनन न करे। इसे अपराध के तौर पर इसलिए रखा गया है ताकि फर्जी और झूठे बयान से किसी की प्रतिष्ठा को दांव पर नहीं लगाया जा सके।

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