-
सीजेआई चंद्रचूड़ ने लिखित परीक्षा की बजाय काबिलियत पर दिया जोर
- कंज्यूमर फोरम के प्रमुखों के पद पर नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सरकार को दी नसीहत
नई दिल्ली। कंज्यूमर फोरम के प्रमुखों के पद पर नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सीजेआई चंद्रचूड़ ने सरकार को नसीहत दी है। सीजेआई ने कहा कि लिखित परीक्षा की बजाय काबिलियत पर जोर दियि जाना चाहिए। दरअसल राज्यों के कंज्यूमर फोरम के प्रमुखों के पद खाली पड़े हैं। इन पदों पर नियुक्ति नहीं होने के पीछे बड़ी वजह लिखित परीक्षा है, जिसके चलते सरकार इन पदों को भर ही नहीं पा रही है। इधर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने इन पदों पर नियुक्ति को लेकर होने वाली प्रक्रिया पर टिप्पणियां की है। सीजेआई ने साफ तौर पर इन फोरम के प्रमुखों के चयन के लिए होने वाली लिखित परीक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
इसके साथ ही उन्होंने सरकार को नसीहत भी दी है। चीफ जस्टिस का मानना है कि राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष के रूप में सेलेक्शन के लिए लिखित परीक्षा, उसके बाद इंटरव्यू देना और परीक्षा और मौखिक परीक्षा दोनों में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करना संवैधानिक अदालत के जजों की गरिमा को गिराने जैसा है। जस्टिस चंद्रचूड़ इस बात से पूरी तरह सहमत दिखे कि हाई कोर्ट का जज किसी भी मामले में हर मुद्दे और यहां तक कि शीर्ष नौकरशाहों की भी जांच कर सकते हैं लेकिन वे इस पद के लिए लिखित परीक्षा के बाद इंटरव्यू देना ही नहीं चाहते हैं।
सीजेआई का कहना है कि जजों की योग्यता को आंकना है तो उसकी तरफ से दिए गए फैसलों से करनी चाहिए। हालांकि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, रिटायर्ड हाई कोर्ट जजों को परीक्षाओं में बैठाना अशोभनीय है। अधिकांश सक्षम रिटायर्ड जज इस परीक्षा के खिलाफ हैं। उनकी क्षमता पर मौजूदा जज के रूप में उनकी तरफ से दिए गए निर्णयों के आधार पर विचार किया जाना चाहिए। सीजेआई ने कहा कि रिटायर्ड जिला जज भी ऐसी सेलेक्शन प्रक्रिया से गुजरने के लिए अनिच्छुक हैं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सीजेआई से सहमत थे। लेकिन सरकार ने सेलेक्शन नियमों में संशोधन करके एससीडीआरसी अध्यक्ष बनने के लिए रिटायर्ड जजों को लिखित परीक्षा-मौखिक चयन प्रक्रिया से गुजरने की आवश्यकता को खत्म कर दिया है।
मेहता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने अब योग्यता परीक्षा के प्रावधान को रद्द कर दिया। हालांकि 100 अंकों के दो पेपर होने हैं, जिनमें सामान्य ज्ञान, संवैधानिक कानून और उपभोक्ता कानूनों में रिटायर्ड जजों की क्षमता, व्यापार और वाणिज्य के साथ-साथ उपभोक्ता-संबंधी मुद्दों या सार्वजनिक मामलों पर निबंध लिखने की उनकी क्षमता का परीक्षण करने के लिए थे। इसके साथ ही विश्लेषण और प्रारूपण में उसकी क्षमताओं को निर्धारित करने के लिए एक केस स्टडी लिखनी होती है।
Comments About This News :
Submit A Comment
Subscription Successfully......!
Error Please Try Again & Check Your Connection......!