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किडनी प्रत्यारोपण कराया तो राशि देने से मुकरी बीमा कंपनी
बीमारी छुपाने का बहाना बनाकर राशि देने से कर रही थी इनकार
भोपाल। प्रदेश के इंदौर शहर के एक उपभोक्ता ने किडनी प्रत्यारोपण कराया तो बीमा कंपनी से इलाज में खर्च राशि को देने से इन्कार कर दिया। बीमा कंपनी ने यह तर्क रखा कि उपभोक्ता शुगर व बीपी की बीमारी से लंबे समय से ग्रसित था। इन दोनों बीमारी को उपभोक्ता ने छुपाया। इस कारण वह बीमा राशि पाने का हकदार नहीं है। इस पर राज्य उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी के बीमा देने से इनकार पर फटकार लगाई और हर्जाना लगा दिया।दरअसल इंदौर की रहने वाली अनिता तिवारी के पति अरविंद तिवारी ने आईसीआइसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से 30 जून 2014 में सात लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा लिया था।
मई 2017 वे किडनी की बीमारी से ग्रसित हो गए और उन्होंने इंदौर के एक निजी अस्पताल में किडनी प्रत्यारोपण कराया। इसमें करीब सात लाख रुपये का खर्चा आया। जब इलाज में खर्च राशि के लिए उपभोक्ता ने आवेदन किया गया तो बीमा कंपनी ने राशि देने से इनकार कर दिया। उनकी मृत्यु भी इस बीमारी से हो गई और उनकी पत्नी को बीमा राशि नहीं दी गई। उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग में याचिका लगाई थी। आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में निर्णय सुनाया था। बीमा कंपनी ने राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील लगा दी।
आयोग के अध्यक्ष एके तिवारी व सदस्य श्रीकांत पांडेय ने उपभोक्ता के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए दो माह के अंदर नौ प्रतिशत ब्याज के साथ इलाज में खर्च सात लाख रुपये, मानसिक क्षतिपूर्ति राशि 10 हजार रुपये व दो हजार रुपये वाद व्यय के रूप में देने का आदेश दिया। उपभोक्ता के अधिवक्ता विवेक आनंद नेमा ने बताया कि आयोग ने बीमा कंपनी को कड़ी फटकार लगाते हुए शुगर व बीपी की बीमारी छुपाया गया इस तर्क को खारिज कर दिया। आयोग ने कहा कि ये दोनों बीमारी सामान्य बीमारी हैं। इस बीमारी का तर्क देकर बीमा कंपनी क्लेम देने से इंकार नहीं कर सकती है।
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