- रहस्यमयी शिवलिंग, महाशिवरात्रि मेला और शिव भक्तों की आस्था! जानें अद्भुत कहानी!

रहस्यमयी शिवलिंग, महाशिवरात्रि मेला और शिव भक्तों की आस्था! जानें अद्भुत कहानी!

अलीगढ़ के सहारा खुर्द गांव में पाताल खेरिया मंदिर तीन पुराने शिवलिंगों के लिए जाना जाता है, जिनके बारे में माना जाता है कि वे ज़मीन के नीचे बहुत गहरे दबे हुए हैं। हर साल महाशिवरात्रि पर भक्त इस मंदिर में आते हैं।

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ ज़िले की इगलास तहसील के सहारा खुर्द गांव में मौजूद पाताल खेरिया मंदिर को आस्था, पौराणिक कथाओं और लोककथाओं का अनोखा संगम माना जाता है।

यहां भगवान शिव के तीन पुराने शिवलिंग स्थापित हैं, जिनकी गहराई और असली हद आज तक पता नहीं चल पाई है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, ये शिवलिंग पाताल तक फैले हुए हैं।

शिवलिंग कार्तिकेय ने स्थापित किए थे
स्थानीय पुजारियों और गांव के बुजुर्गों के अनुसार, इन तीन शिवलिंगों की स्थापना खुद भगवान शिव के बेटे कार्तिकेय ने की थी। कहानी के अनुसार, यह स्थापना राक्षस ताड़कासुर के वध के बाद हुई थी।

ताड़कासुर के वध और शिव के गुस्से की कहानी
कहानी के अनुसार, ताड़कासुर भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्त था। कड़ी तपस्या के बाद, उसे कई वरदान मिले, जिससे वह बहुत ताकतवर और अजेय बन गया। उसके अत्याचारों से देवता और धरती के लोग डर गए थे। देवताओं की रक्षा के लिए, शिव के बेटे कार्तिकेय ने ताड़कासुर का वध कर दिया।

हालांकि, जब यह खबर भगवान शिव तक पहुंची, तो वे अपने भक्त की हत्या से बहुत दुखी हुए और उग्र रूप धारण करने के लिए तैयार थे। उसी समय, महाशक्ति ने बीच में आकर कार्तिकेय से कहा कि अगर वह तीन शिवलिंग स्थापित करें और शिव की पूजा करें, तो उनका गुस्सा शांत हो सकता है। इसके बाद, सहारा खुर्द के पास तीन जगहों पर शिवलिंग स्थापित किए गए।

तीन शिवलिंगों के नाम और मान्यताएं

इन तीन शिवलिंगों के नाम हैं:

श्री कुमारेश्वर महादेव,

प्रतिज्ञेश्वर महादेव,

और कपालेश्वर महादेव।

स्थानीय लोग इन्हें मिलकर "गुप्त शिवलिंग" भी कहते हैं। माना जाता है कि इन शिवलिंगों में दिव्य शक्तियाँ हैं, और धरती के अंदर इनकी असली गहराई किसी को नहीं पता।

शिवलिंगों की गहराई नापने की नाकाम कोशिश
स्थानीय पुजारी पंडित गोपाल शर्मा के अनुसार, कई दशक पहले, कुछ लोगों ने इन शिवलिंगों की गहराई नापने की कोशिश की थी। जब ज़मीन की खुदाई की गई, तो थोड़ी गहराई पर पानी निकला, लेकिन कोई भी शिवलिंगों के नीचे तक नहीं पहुँच सका। इससे लोगों का यह विश्वास और पक्का हो गया कि ये शिवलिंग पाताल तक फैले हुए हैं।

'पाताल खेड़िया' नाम के पीछे की मान्यता
जिस जगह ये शिवलिंग हैं, उसे पाताल खेड़िया कहा जाता है। स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, यह नाम शिवलिंगों की रहस्यमयी गहराई से जुड़ा है। गाँव वालों का मानना ​​है कि धरती के अंदर दिव्य ऊर्जा का प्रवाह है, जो इस जगह को साधकों और भक्तों के लिए खास महत्व देता है। ऐसा माना जाता है कि सच्चे दिल से की गई प्रार्थना का जल्दी फल मिलता है। महाशिवरात्रि पर बड़ा मेला
महाशिवरात्रि के मौके पर पाताल खेड़िया मंदिर परिसर में एक बड़ा मेला लगेगा। इस मौके पर शादीशुदा महिलाएं अपने परिवार के साथ यहां भगवान शिव की पूजा करने और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करने आती हैं।

स्थानीय प्रशासन और गांव की कमेटी सुरक्षा, पीने के पानी, रोशनी और मेडिकल सुविधाओं की तैयारी कर रही है। अलीगढ़ शहर और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में भक्तों के आने की उम्मीद है।

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