- 'गिग सेक्टर में काम कर रहे बांग्लादेशी-रोहिंग्या घुसपैठिए': Swiggy, Zomato आदि से जुड़े लोगों की होगी कड़ी जाँच

'गिग सेक्टर में काम कर रहे बांग्लादेशी-रोहिंग्या घुसपैठिए': Swiggy, Zomato आदि से जुड़े लोगों की होगी कड़ी जाँच

महाराष्ट्र में गिग वर्कर्स को लेकर राजनीति गरमा गई है। BJP नेता किरीट सोमैया ने आरोप लगाया है कि बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठिए गिग सेक्टर में काम कर रहे हैं, खासकर Swiggy और Zomato जैसी कंपनियों में।

महाराष्ट्र में गिग वर्कर्स के वेरिफिकेशन को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ हो गई है। यह पूरा विवाद राष्ट्रीय सुरक्षा, अवैध घुसपैठ और राजनीतिक कीचड़ उछालने जैसे मुद्दों के इर्द-गिर्द घूम रहा है। महाराष्ट्र सरकार ने Swiggy, Zomato और Blinkit जैसी कंपनियों से जुड़े गिग वर्कर्स (डिलीवरी करने वालों) का कड़ा वेरिफिकेशन करने का फैसला किया है। सरकार इस मकसद के लिए बहुत जल्द एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लाने वाली है।

**बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठिए यहाँ काम कर रहे हैं: किरीट सोमैया**

BJP नेता किरीट सोमैया ने आरोप लगाया है कि गिग वर्क सेक्टर में इस समय बड़ी संख्या में बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठिए काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग अवैध रूप से रह रहे हैं और आपराधिक गतिविधियों में शामिल पाए गए हैं। नतीजतन, सोमैया ने मांग की है कि सरकार "गिग वर्कर्स के लिए पासपोर्ट वेरिफिकेशन जैसा कड़ा वेरिफिकेशन प्रोसेस" लागू करे। रिपोर्टों के अनुसार, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार ने इस प्रस्ताव पर सहमति जता दी है। कल ही गृह विभाग और श्रम विभाग की एक बैठक हुई थी। इसमें फैसला लिया गया कि कड़ी जांच और वेरिफिकेशन प्रक्रिया अपनाई जाएगी, और राज्य में अवैध रूप से रहने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उम्मीद है कि SOP एक महीने के भीतर लागू हो जाएगा।

**गिग वर्कर्स की प्रतिक्रिया**

ज़मीनी स्तर पर प्रतिक्रिया मिली-जुली रही है। कुछ गिग वर्कर्स का तर्क है कि कड़ा वेरिफिकेशन ज़रूरी है क्योंकि अभी थर्ड-पार्टी वेरिफिकेशन के तरीके कमज़ोर हैं, जिससे बाहरी लोगों के इस सेक्टर में घुसपैठ करने की गुंजाइश बनी रहती है। उन्होंने आगे ज़ोर देकर कहा कि कई बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठिए सचमुच इस क्षेत्र में घुस आए हैं। उन्होंने कहा कि बेईमान लोगों की मौजूदगी बाकी कामगारों पर भी शक पैदा करती है, जिससे ज़्यादातर लोगों को इसके बुरे नतीजों का सामना करना पड़ता है। इसलिए, वे कड़े वेरिफिकेशन उपायों को लागू करने का समर्थन करते हैं। इसके विपरीत, कुछ अन्य गिग वर्कर्स ने अपनी आशंकाएं ज़ाहिर की हैं। उन्होंने चिंता जताई कि सरकार को बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों की पहचान करने के बहाने का इस्तेमाल मुस्लिम कामगारों को बाहर निकालने की साज़िश रचने के लिए नहीं करना चाहिए। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, "हमारे पास वैध आधार और PAN कार्ड हैं; हम बाहरी नहीं हैं, बल्कि इसी ज़मीन के रहने वाले हैं।" उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह यह सुनिश्चित करे कि उसकी सत्यापन प्रक्रिया किसी भी प्रकार के भेदभाव से मुक्त रहे। धर्म के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। निष्पक्ष सत्यापन आवश्यक है।

**विपक्ष के आरोप**
समाजवादी पार्टी के नेता अबू आज़मी ने AIMIM और कांग्रेस के साथ मिलकर आरोप लगाया है कि सरकार मुसलमानों को निशाना बना रही है। उनका दावा है कि उन्हें उनकी आजीविका से वंचित करने की साज़िश चल रही है। उनका तर्क है कि यह "सुरक्षा" का मामला नहीं है, बल्कि एक राजनीतिक एजेंडा है। विपक्ष का कहना है कि यदि वास्तव में घुसपैठ हुई है, तो यह सरकार की विफलता है, और आम नागरिकों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। फिलहाल, गिग वर्कर्स के सत्यापन का मुद्दा सुरक्षा चिंताओं और राजनीतिक दांव-पेच के बीच फंसा हुआ है। अब यह देखना बाकी है कि क्या सरकार की आने वाली मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOPs) इस विवाद को सुलझा पाएंगी या इसे और बढ़ा देंगी।

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