- छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता लागू करने की तैयारी जारी; महिलाओं के लिए संपत्ति पंजीकरण पर 50% की छूट

UCC को लागू करने की प्रक्रिया शुरू करते हुए, सरकार ने एक समिति बनाने को मंज़ूरी दे दी है और महिलाओं के लिए प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन फीस पर 50 प्रतिशत की छूट देने का फ़ैसला किया है। उम्मीद है कि इस कदम से कानूनी समानता बढ़ेगी और महिलाओं की आर्थिक स्थिति मज़बूत होगी।


छत्तीसगढ़ सरकार ने कानूनी समानता सुनिश्चित करने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के दौरान, राज्य में यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड (UCC) को लागू करने की प्रक्रिया शुरू करने का फ़ैसला लिया गया, साथ ही महिलाओं के लिए प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन फीस पर 50 प्रतिशत की छूट देने का भी फ़ैसला हुआ। कैबिनेट ने UCC का मसौदा तैयार करने के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति बनाने को मंज़ूरी दे दी है। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई करेंगी।


'न्याय व्यवस्था ज़्यादा सरल और पारदर्शी बनेगी'
यह समिति आम नागरिकों, कानूनी विशेषज्ञों और अलग-अलग पक्षों से सलाह-मशविरा करने के बाद एक विस्तृत मसौदा तैयार करेगी। इसके बाद, सभी कानूनी नियमों का पालन करते हुए, इस प्रस्ताव को विधानसभा में पेश किया जाएगा। सरकार का कहना है कि UCC के लागू होने से, शादी, तलाक़, प्रॉपर्टी और पारिवारिक मामलों से जुड़े अलग-अलग धर्मों के अलग-अलग पर्सनल कानूनों की जगह एक ही समान कानून लागू होगा। इससे न्याय व्यवस्था सभी के लिए—खासकर महिलाओं के लिए—ज़्यादा सरल, पारदर्शी और ज़्यादा निष्पक्ष बनेगी।

'महिलाओं के लिए प्रॉपर्टी खरीदना ज़्यादा किफ़ायती होगा'
जानकारों का मानना ​​है कि छत्तीसगढ़ जैसे विविध राज्य में—जहाँ आदिवासी, ग्रामीण और शहरी आबादी रहती है—यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड के लागू होने से कानूनी पेचीदगियाँ कम होंगी और सामाजिक सौहार्द बढ़ेगा। इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि UCC लंबे समय से पूरे देश में बहस का विषय रहा है। इसके अलावा, एक और बड़े फ़ैसले में, कैबिनेट ने महिलाओं के नाम पर रजिस्टर्ड प्रॉपर्टी के लिए रजिस्ट्रेशन फीस पर 50 प्रतिशत की छूट देने का ऐलान किया। इससे महिलाओं के लिए प्रॉपर्टी खरीदना ज़्यादा आसान और किफ़ायती हो जाएगा, साथ ही परिवारों को भी महिलाओं के नाम पर प्रॉपर्टी रजिस्टर करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

'राजस्व पर ₹153 करोड़ का संभावित असर'
राज्य सरकार के मुताबिक, इस फ़ैसले से राजस्व पर लगभग ₹153 करोड़ का संभावित असर पड़ सकता है। हालाँकि, सरकार इसे महिलाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से किया गया एक दीर्घकालिक सामाजिक निवेश मानती है। विश्लेषकों का मानना ​​है कि इस नीति से महिलाओं की संपत्ति में हिस्सेदारी बढ़ेगी, विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में, जहाँ ऐतिहासिक रूप से उनकी भागीदारी सीमित रही है। सरकार की यह पहल महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक सुरक्षा को मज़बूत करने में एक अहम भूमिका निभा सकती है।

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