दिल्ली की एक अदालत ने पिछले आदेश को रद्द कर दिया है और 1980 की वोटर लिस्ट में सोनिया गांधी का नाम शामिल किए जाने से जुड़े मामले में नई सुनवाई का निर्देश दिया है। बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने इस मामले पर राहुल गांधी से जवाब मांगा है।
बीजेपी ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी का नाम पुरानी वोटर लिस्ट में होने के मुद्दे पर राहुल गांधी से स्पष्टीकरण मांगा है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी का नाम 1980 की वोटर लिस्ट में तब दर्ज किया गया था, जब उनके पास भारतीय नागरिकता नहीं थी। उन्होंने सवाल उठाया कि उस दौरान उनकी मां का नाम वोटर लिस्ट में कैसे शामिल हो गया।
अब दिल्ली की अदालत में यह मामला फिर से खुल गया है। 21 सितंबर 2026 को, दिल्ली की राउज़ एवेन्यू स्थित विशेष अदालत ने उस पिछले आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया गया था। अदालत ने मामले को नई सुनवाई के निर्देश के साथ मजिस्ट्रेट के पास वापस भेज दिया।
**प्रदीप भंडारी ने राहुल गांधी से जवाब मांगा**
राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि उन्हें यह बताना चाहिए कि सोनिया गांधी का नाम वोटर लिस्ट में कैसे आया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह प्रक्रिया उस समय की सरकार या किसी प्रभावशाली व्यक्ति की मदद से पूरी की गई थी। भंडारी ने आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने के लिए सही प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं, इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि राहुल गांधी पूरे मामले पर जवाब दें।
**1980 की वोटर लिस्ट को लेकर क्या विवाद है?**
यह मामला वकील विकास त्रिपाठी की शिकायत से जुड़ा है, जिन्होंने आरोप लगाया था कि नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र के लिए 1980 की वोटर लिस्ट में सोनिया गांधी का नाम शामिल किया गया था, जबकि उन्हें भारतीय नागरिकता 30 अप्रैल 1983 को मिली थी। शिकायतकर्ता का दावा है कि 1980 की लिस्ट में नाम दर्ज होने के बाद, सोनिया गांधी का नाम 1982 में हटा दिया गया और बाद में 1983 में फिर से शामिल कर लिया गया। इन्हीं आधारों पर उन्होंने जांच और FIR दर्ज करने की मांग की थी। हालांकि, ये शिकायत में लगाए गए आरोप हैं। अदालत ने अभी तक इन्हें साबित तथ्य के तौर पर स्वीकार नहीं किया है।
दिल्ली की अदालत ने क्या कहा? इस मामले में, मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पहले FIR दर्ज करने की अर्ज़ी खारिज कर दी थी। विकास त्रिपाठी ने इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ दिल्ली की एक स्पेशल कोर्ट में याचिका दायर की। 21 सितंबर को स्पेशल जज विशाल गोगने ने मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पहले के आदेश में पर्याप्त कारण नहीं बताए गए थे और पुलिस से कोई स्टेटस रिपोर्ट भी नहीं मांगी गई थी। अब मामले को मजिस्ट्रेट कोर्ट में वापस भेज दिया गया है और 29 सितंबर को इस पर फिर से सुनवाई होगी।