- "इतने सालों से यह सब..." – राम मंदिर दान चोरी मामले पर सचिन पायलट ने नाराज़गी जताई।

सचिन पायलट ने राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी को लेकर केंद्र और यूपी सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के जज की देखरेख में जांच, ट्रस्ट को भंग करने और उचित कार्रवाई की मांग की।

राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट ने राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी को लेकर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकारों की आलोचना की। शनिवार (11 जुलाई) को आगरा पहुंचने के बाद पायलट ने कहा कि यह मामला लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है और इसलिए इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज की देखरेख में हो और जांच पूरी होने तक मौजूदा ट्रस्ट कमेटी को भंग कर दिया जाए।

सचिन पायलट ने कहा कि राम मंदिर से जुड़ी अनियमितताओं के आरोप बेहद गंभीर हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह जानना जरूरी है कि किनकी सिफारिश पर ट्रस्टियों की नियुक्ति की गई और ये गतिविधियां इतने लंबे समय तक कैसे चलती रहीं।

उन्होंने कहा कि अब तक सामने आए तथ्य शायद पूरी सच्चाई का एक छोटा सा हिस्सा ही हों। सरकार को इस पूरे मामले पर देश के सामने स्पष्ट जवाब देना चाहिए। पायलट ने कहा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए; अगर किसी भी स्तर पर गड़बड़ी हुई है, तो दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए, चाहे वे कितने भी प्रभावशाली क्यों न हों।

उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा SIT जांच पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जिससे लगता है कि कुछ लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री से व्यक्तिगत रूप से आगे आने और श्रद्धालुओं का भरोसा बहाल करने का आग्रह किया।

**ट्रस्ट कमेटी को भंग करने की मांग**
कांग्रेस नेता ने मौजूदा ट्रस्ट कमेटी को तुरंत भंग करने और पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज की देखरेख में कराने की मांग की। उन्होंने तर्क दिया कि जांच पूरी होने तक संबंधित कमेटी को दोबारा जिम्मेदारियां नहीं सौंपी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मामले में शामिल लोगों को नैतिक आधार पर पद छोड़ देना चाहिए ताकि पूरी तरह से निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके।

पायलट ने कहा कि वह ये मुद्दे किसी राजनीतिक दल की ओर से नहीं उठा रहे हैं, बल्कि जनभावना और श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी चिंताओं को व्यक्त कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां विपक्षी दलों से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियां ​​तुरंत हरकत में आ जाती हैं, वहीं इस मामले में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं दिख रही है। उन्होंने कहा कि सरकार सिर्फ कमेटियां बनाकर समय नहीं काट सकती; बल्कि उसे पारदर्शी और प्रभावी जांच सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु आस्था और विश्वास के कारण दान देते हैं, और अगर किसी भी स्तर पर उस भरोसे को ठेस पहुँची है, तो देश के सामने पूरी सच्चाई आनी चाहिए।

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह किसी राजनीतिक दल का मामला नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा मुद्दा है। इसलिए, केवल निष्पक्ष जाँच, जवाबदेही और दोषियों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई से ही जनता का भरोसा बना रह सकता है।


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