उत्तर प्रदेश की योगी कैबिनेट ने राज्य को 'ग्लोबल मैनपावर हब' (वैश्विक कार्यबल केंद्र) में बदलने का एक बड़ा फ़ैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी ने घोषणा की कि राज्य के सभी 75 ज़िलों को शामिल करते हुए नौ ज़ोन में स्किल ट्रेनिंग और रोज़गार के लिए एक इंटीग्रेटेड सिस्टम विकसित किया जाएगा।
शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में 'सरदार वल्लभभाई पटेल स्किल ट्रेनिंग एंड एम्प्लॉयमेंट ज़ोन (SVPSTPZ) विकास योजना' को मंज़ूरी दी गई। इस योजना का मकसद उत्तर प्रदेश को 'स्किल्ड मैनपावर का अल्टीमेट सोर्सिंग हब' और 'ग्लोबल मैनपावर हब' बनाना है। इस पहल के तहत, सभी 75 ज़िलों को कवर करते हुए नौ ज़ोन में स्किल ट्रेनिंग और रोज़गार के लिए एक इंटीग्रेटेड फ़्रेमवर्क बनाया जाएगा। इससे युवाओं को औद्योगिक ज़रूरतों के हिसाब से ट्रेनिंग देने और उन्हें देश-विदेश में रोज़गार के मौकों से जोड़ने में मदद मिलेगी।
**औद्योगिक ज़रूरतों के हिसाब से तैयार होगा स्किल्ड वर्कफ़ोर्स**
उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास में MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) सेक्टर अहम भूमिका निभाता है। राज्य में लगभग 96 लाख MSME इकाइयाँ हैं, जो देश के कुल 6.77 करोड़ उद्यमों का 14.2 प्रतिशत हैं। यह सेक्टर राज्य के औद्योगिक उत्पादन में लगभग 60 प्रतिशत और निर्यात में लगभग 45 प्रतिशत का योगदान देता है, और 3 करोड़ से ज़्यादा लोगों को रोज़गार देता है। यह योजना बढ़ती औद्योगिक ज़रूरतों को पूरा करने के लिए स्किल्ड वर्कफ़ोर्स की उपलब्धता सुनिश्चित करने और युवाओं को बड़े पैमाने पर रोज़गार के मौकों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगी।
**नौ ज़ोन में 'हब-एंड-स्पोक' मॉडल**
राज्य के ज़िलों को नौ ज़ोन में बाँटकर 'हब-एंड-स्पोक' मॉडल के आधार पर स्किल डेवलपमेंट और रोज़गार के लिए एक इंटीग्रेटेड सिस्टम विकसित किया जाएगा। हर ज़ोन में ट्रेनिंग की व्यवस्था वहाँ की स्थानीय औद्योगिक गतिविधियों, बाज़ार की माँग और रोज़गार की संभावनाओं के हिसाब से की जाएगी। इस पहल के ज़रिए, अलग-अलग उद्योगों, बाज़ार सेक्टरों और सरकारी विभागों की ह्यूमन रिसोर्स ज़रूरतों का आकलन करके रोज़गार के मौके पैदा किए जाएँगे। इस स्कीम के पहले चरण में, पांच मुख्य जगहों पर स्किल ट्रेनिंग और रोज़गार केंद्र बनाए जाएंगे। हर केंद्र को अलग-अलग संस्थाएं स्थापित करेंगी: लखनऊ में MSME विभाग; कानपुर में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के आधार पर; गोरखपुर में गोरखपुर इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (GIDA); गौतम बुद्ध नगर में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) के सहयोग से; और झांसी में बुंदेलखंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (BIDA) द्वारा।
ज़ोन-1: गौतम बुद्ध नगर, गाज़ियाबाद और हापुड़।
ज़ोन-2: सहारनपुर डिवीज़न और बुलंदशहर, बागपत और मेरठ।
ज़ोन-3: मुरादाबाद और बरेली डिवीज़न।
ज़ोन-4: आगरा और अलीगढ़ डिवीज़न।
ज़ोन-5: लखनऊ और अयोध्या डिवीज़न।
ज़ोन-6: कानपुर और प्रयागराज डिवीज़न।
ज़ोन-7: चित्रकूट, विंध्याचल और झांसी डिवीज़न।
ज़ोन-8: वाराणसी और आज़मगढ़ डिवीज़न।
ज़ोन-9: गोरखपुर, बस्ती और देवीपाटन डिवीज़न।
10 से 25 एकड़ में केंद्र विकसित किए जाएंगे
हर केंद्र को बनाने के लिए 10 से 25 एकड़ उपयुक्त और बिना किसी कानूनी अड़चन वाली ज़मीन का इंतज़ाम किया जाएगा। केंद्रों तक आसानी से पहुँचने के लिए, दो साल के भीतर पास के हाईवे या एक्सप्रेसवे से चार-लेन सड़क कनेक्टिविटी देने का प्रावधान किया गया है। इन केंद्रों का विकास और संचालन या तो पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) आधारित डिज़ाइन-बिल्ड-फ़ाइनेंस-ऑपरेट-ट्रांसफ़र (DBFOT) मॉडल के ज़रिए या सरकारी एजेंसियों के ज़रिए किया जाएगा।
तकनीकी और गैर-तकनीकी ट्रेनिंग, जिसमें देसी और विदेशी भाषाएं शामिल हैं
इस स्कीम के तहत, गैर-तकनीकी विषयों—जैसे ह्यूमैनिटीज़ और कॉमर्स—के बैकग्राउंड वाले युवाओं को बेसिक स्किल ट्रेनिंग दी जाएगी। ITI, पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग बैकग्राउंड वाले युवाओं के लिए तकनीकी स्किल अपग्रेडेशन का इंतज़ाम किया जाएगा। देश और विदेश में उपलब्ध रोज़गार के मौकों के हिसाब से, खास ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए भारतीय और विदेशी भाषाओं में ट्रेनिंग दी जाएगी। ट्रेनिंग लेने वालों के लिए हॉस्टल की सुविधा के साथ-साथ कैंपस में ही रोज़गार कार्यालय और प्लेसमेंट सेल भी बनाए जाएंगे। देश और विदेश में रोज़गार के क्षेत्र में काम करने वाली जानी-मानी एजेंसियों के साथ तालमेल बिठाकर, ट्रेंड युवाओं को नौकरी के मौकों से जोड़ने के लिए एक सिस्टम बनाया जाएगा।
**तीन साल में ₹1,725 करोड़ का खर्च**
इस प्रोजेक्ट पर अगले तीन सालों में कुल ₹1,725 करोड़ का खर्च आने का अनुमान है। ज़रूरत पड़ने पर प्राइवेट डेवलपर्स और ट्रेनिंग देने वालों को 'वायबिलिटी गैप फंडिंग' (VGF) भी दी जा सकती है। स्कीम को पारदर्शी और असरदार तरीके से लागू करने के लिए राज्य, ज़िले और प्रोजेक्ट लेवल पर तालमेल और निगरानी के सिस्टम बनाए गए हैं। इसमें प्रोजेक्ट की स्थापना, कामकाज, वित्तीय प्रबंधन और ट्रेनिंग की निगरानी शामिल है।
क्वालिटी और रोज़गार से जुड़ी गतिविधियों पर ध्यान दिया जाएगा। उद्योगों, संबंधित विभागों और औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के बीच तालमेल बिठाकर योजना के लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से हासिल करने पर ज़ोर दिया जाएगा। इसके अलावा, स्किल ट्रेनिंग और रोज़गार सिस्टम को और बेहतर बनाने के लिए डिजिटल डैशबोर्ड, डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित तकनीकी टूल्स का इस्तेमाल किया जाएगा; इसके लिए उपयुक्त टेक्नोलॉजी पार्टनर चुनने की व्यवस्था भी की गई है।